गाजीवाली नहीं, आर्यनगर ही कहा करो; हरिद्वार में शहर के नाम पर CM पुष्कर धामी सख्त हुए
हरिद्वार में चौपाल कार्यक्रम के दौरान सीएम पुष्कर धामी का अलग अंदाज देखने को मिला। सिर पर पगड़ी पहने धामी ने हरिद्वार ग्रामीण के शहर गाजीवाली नाम पर ऐतराज जताया। कहा कि अब इसे आर्यनगर ही कहा करो।

हरिद्वार में ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम के दौरान चौपाल कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर धामी का नया और सख्त अंदाज देखने को मिला। स्पष्ट किया कि उनकी सरकार, सचिवालय के कमरों और फाइलों के अंबार तक सीमित नहीं रहेगी। इस दौरान उन्होंने हरिद्वार ग्रामीण के नाम गाजीवाली को लेकर भी ऐतराज जताया। दो टूक शब्दों में कहा कि अब गाजीवाली-गाजवाली नहीं आर्यनगर ही कहा करो।
‘सरकार फाइलों में नहीं, मैदान में काम करेगी’, मुख्यमंत्री के इस संकल्प की गूंज पूरी चौपाल में सुनाई दी। कार्यक्रम में सीएम ने न सिर्फ लोगों की समस्याएं सुनीं, बल्कि संबंधित विभागों को समाधान सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश भी दिए। सीएम ने जनता से सीधा संवाद किया तो तमाम गांवों से पहुंचे ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों ने उन्हें समस्याएं बताईं। मुख्यमंत्री ने बिना किसी देरी के संबंधित विभागीय अधिकारियों को तलब किया और मौके पर ही समाधान के निर्देश दिए। सीएम ने अफसरों से दो टूक कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान में देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने लोगों को भरोसा दिलाया कि जनसमस्याओं के समाधान में किसी प्रकार की शिथिलता नहीं होगी। सरकार हर समय और हर परिस्थिति में जनता के साथ खड़ी मिलेगी।
गाजीवाली नहीं आर्यनगर कहा करो
सीएम पुष्कर धामी ने अपने संबोधन के दौरान हरिद्वार ग्रामीण में गाजीवाली नाम का मुद्दा उठाया। धामी ने कहा कि श्यामपुर क्षेत्र में नाम आप सब लोगों ने कहा कि आर्यनगर होना चाहिए। हमने शासनादेश जारी कर दिया, लेकिन अभी भी कुछ लोग गाजीवाली-गाजीवाली ही कर रहे हैं। अब आप सभी इसे आर्यनगर ही कहा करिए। मैंने कहा अब गाजीवाली मत कहो... शासनादेश हो गया है कि आर्यनगर ही कहो। जब शासनादेश आएगा, आ जाएगा।
पहली बार खाट पर मुख्य सेवक चौपाल
पहली बार खाट पर मुख्य सेवक चौपाल हुई। लोगों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पगड़ी पहनाते हुए सर्वमान्य बनाकर बैठाया। मुख्यमंत्री का यह अंदाज हर किसी को भाया। इस दौरान धामी ने अपने भाषण में आश्वस्त किया कि समस्या कैसी भी हो, हर किसी का समाधान होगा।
साधु-संतों और आमजन से संवाद
मुख्यमंत्री ने साधु-संतों और आमजन से संवाद किया। उन्होंने जनसमस्याएं सुनी और अफसरों को समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों की जनता जिला मुख्यालय तक आकर अपनी शिकायतें दर्ज नहीं कर पाती है। ऐसे लोगों की समस्याओं को सीधे सुनने के लिए जन चौपाल का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए सरकार जनता के सुझावों को ही अपना मार्गदर्शक मानती है।
कुंभ मेले को लेकर अब अगली बैठक हरिद्वार में
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली-पानी समेत तमाम शिकायतों का समाधान अब घर पहुंचकर किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि 2027 में प्रस्तावित कुंभ मेले की भव्य तैयारी शुरू कर दी गई है। अगली बैठक हरिद्वार में होगी, जिसमें यहां की तमाम व्यवस्थाओं की समीक्षा और तैयारियों को परखा जाएगा।
चारधाम यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
धामी ने कहा कि इस बार चारधाम यात्रा समय से पहले शुरू होने जा रही है। तीर्थयात्रियों का स्वागत और भी उत्साह के साथ किया जाएगा। साल-दर-साल चारधाम यात्रियों की संख्या बढ़ रही है, इसलिए उसी अनुरूप सभी तैयारियां की जा रही हैं।
पेश किया सरकार का रिपोर्ट कार्ड
रोजगार का रिकॉर्ड: नौकरियों की पारदर्शी चयन प्रक्रिया के माध्यम से अब तक 27,000 से अधिक युवाओं को सरकारी नियुक्तियां दी जा चुकी हैं।
अन्नदाता का सम्मान: किसानों की आय बढ़ाने के लिए सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए नई तकनीकों और योजनाओं को धरातल पर उतारा जा रहा है।
महिला सशक्तीकरण : लखपति दीदी योजना जैसे कार्यक्रमों से महिलाओं को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाया जा रहा है।
ऐतिहासिक यूसीसी : आजादी के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य।
जनता से जुड़ाव: ‘डबल इंजन’ सरकार के समन्वय से उत्तराखंड विकास की नई ऊंचाइयां छू रहा है। ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ उत्तराखंड को श्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए जनता के सुझाव ही सरकार के मार्गदर्शक।

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