केदारनाथ में वीआईपी दर्शन पर तीर्थपुरोहित भड़के, गेट बंद कराने और रोक लगाने की मांग

हिन्दुस्तान, रुद्रप्रयाग
Follow us on Google News
share

केदारनाथ में वीआईपी सिस्टम और वीआईपी गेट बंद करने की मांग को लेकर शुक्रवार को तीर्थपुरोहितों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि इससे आम श्रद्धालुओं को दर्शन करने में असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच उन्होंने बीकेटीसी अध्यक्ष के सम्मुख अपनी बात को रखा। इसके बाद मामला शांत हो गया।

केदारनाथ में वीआईपी दर्शन पर तीर्थपुरोहित भड़के, गेट बंद कराने और रोक लगाने की मांग

केदारनाथ में वीआईपी सिस्टम और वीआईपी गेट बंद करने की मांग को लेकर शुक्रवार को तीर्थपुरोहितों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि इससे आम श्रद्धालुओं को दर्शन करने में असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच उन्होंने बीकेटीसी अध्यक्ष के सम्मुख अपनी बात को रखा। हालांकि बाद में तीर्थपुरोहित और बीकेटीसी अध्यक्ष के बीच बातचीत हुई। जिसके बाद मामला शांत हो गया।

शुक्रवार को केदारनाथ में कुछ लोग वीआईपी गेट से अंदर जाने का प्रयास कर रहे थे। इसी बीच तीर्थपुरोहितों को किसी ने ऐसी सूचना दी गई कि उन्हें भी अंदर जाने से मना किया जा रहा है। इसी बात को लेकर तीर्थपुरोहित आक्रोशित हो गए। करीब पचास तीर्थपुरोहित मंदिर के वीआईपी गेट के समीप नारेबजी करने लगे। आक्रोशित तीर्थपुरोहितों ने वीआईपी गेट बंद करो, वीआईपी सिस्टम बंद करो के नारे लगाए। तीर्थ पुरोहितों ने कहा इससे श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। करीब डेढ़ घंटे यह मामला चलता रहा।

बीकेटीसी अध्यक्ष ने तीर्थ पुरोहितों से बातचीत की

केदारनाथ धाम में मौजूद बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी मौके पर आए। उन्होंने तीर्थपुरोहितों से वार्ता की। तीर्थपुरोहितों की जिस बात को लेकर नाराजगी थी। उन्हें समझाया गया कि किसी के द्वारा कुछ नहीं कहा गया। तीर्थपुरोहितों के अंदर न जाने को लेकर जब असमंजस्य खत्म हुआ। तब जाकर उनका आक्रोश थमा।

केदार सभा के अध्यक्ष राजकुमार तिवारी ने बताया कि गलतफहमी के कारण कुछ तीर्थपुरोहित नारेबाजी करने लगे किंतु बाद में अध्यक्ष के मौके पर आने पर मामला शांत हो गया। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि वीआईपी की आड़ में कुछ लोगों ने वीआईपी गेट से अंदर जाने का प्रयास किया गया जिससे यह स्थिति पैदा हुई।

वीआईपी दर्शन जैसी व्यवस्था नहीं

द्विवेदी ने कहा कि यात्रा प्रबंधन सुव्यवस्थित रूप से हो रहा है। तीर्थपुरोहितों, मंदिर समिति, प्रशासन के बीच समन्वय बना हुआ है। किसी प्रकार का मतभेद नहीं है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी कपाट खुलने पर सामान्य श्रद्धालु की तरह दर्शन किए। प्रसिद्ध उद्योगपति गौतम अडानी ने भी तय प्रोटोकॉल में ही दर्शन किए। वीआईपी जैसी कोई व्यवस्था नहीं है।

मंदिर में विवाद के बाद पुलिस अफसर हटाए गए

केदारनाथ में तीर्थ पुरोहितों को मंदिर में प्रवेश से रोके जाने के मामले में सम्बन्धित पुलिस अधिकारियों को हटा दिया गया है। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि भ्रम फैलने से जो स्थिति पैदा हुई थी, उसे दूर कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद तीर्थपुरोहितों की प्रतिक्रिया स्वाभाविक थी। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एसपी रुद्रप्रयाग से समन्वय स्थापित किया गया। इसके बाद संबंधित सीओ और उपनिरीक्षक को मंदिर ड्यूटी से हटा दिया गया है।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।