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दाने-दाने को मोहताज है टनकपुर मंडी समिति का गेहूं तौल केन्द्र

दाने-दाने को मोहताज है टनकपुर मंडी समिति का गेहूं तौल केन्द्र

टनकपुर मंडी समिति में बने गेहूं खरीद केन्द्र में अब तक एक भी दाना गेहूं का नहीं पहुंचा है जबकि गेहूं की खरीद के लिए साधन सहकारी समिति ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मंडी में गेहूं न पहुंचने का कारण खरीद मूल्य कम होना बताया जा रहा है। पिछले वर्ष भी यहां की मंडी में गेहूं नहीं पहुंचा था। गेहूं खरीद के लिए चम्पावत जिले की टनकपुर और बनबसा मंडियों में सीजन में एक-एक कांटा लगाया जाता है। इस बार एक अप्रैल से ही दोनों जगहों पर कांटे लगाये जा चुके हैं, लेकिन गेहूं की आवक नहीं हो रही है। बताया जा रहा है कि साधन सहकारी समिति की ओर से निर्धारित मूल्य से कही अधिक दाम पर काश्तकारों का गेहूं उनके मोहल्ले और कस्बों में ही बिक जाता है। दूसरा कारण मंडी में गेहूं बेचने पर काश्तकारों को नगद धन नहीं मिलता बल्कि उनके खातों में डाला जाता है। इस प्रक्रिया में दो से तीन माह लग जाते हैं। इससे काश्तकार मंडी में गेहूं बेचने के बजाय नगदी के चक्कर में औने-पौने दामों में ही गेहूं बेच देते हैं। आमबाग के गेहूं उत्पादक किसान तारा चंद, सतीश चंद, देव सिंह, भगवान सिंह कठायत, ककरालीगेट के प्रकाश चंद, करम चंद, बिचई के दीवानी चंद, गोविंद जोशी, भरत रजवार आदि ने बताया कि मंडी से जितना मूल्य मिलता है उससे 200 से 300 रुपये अधिक में काश्तकार अपने आस-पड़ोस में ही गेहूं बेच देता है। सरकार को गेहूं की खरीद का मूल्य बढ़ाना चाहिए, जिससे काश्तकारों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।

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  • Web Title:The grain weavers are distressed is the wheat weighing center of Tanakpur Mandi Committee