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पोकलैंड और मोबाइल की रोशनी के सहारे हो रहा बाढ़ सुरक्षा कार्य

पोकलैंड और मोबाइल की रोशनी के सहारे हो रहा बाढ़ सुरक्षा कार्य

टनकपुर की शारदा नदी में गांवों को बाढ़ के खतरे से बचाने के लिए इन दिनों चल रहे सुरक्षा कार्यों में भारी गड़बड़झाले की शिकायतें मिल रही हैं। ठेकेदार नियम ताक पर रखकर मध्यरात्रि तक पोकलैंड और मोबाइल की रोशनी के सहारे ब्लॉक निर्माण में जुटे हुए हैं। रात के वक्त नदी में मौजूद आरबीएम और रेत को ठिकाने लगाकर लाखों के वारे-न्यारे करना ही इस कार्य का प्रमुख मकसद माना जा रहा है।

खासबात यह है कि रात के वक्त चलने वाले कार्य विभागीय अधिकारियों की गैरमौजूदगी में हो रहा है। इससे आशंका जताई जा रही है कि निर्माण के बाद ये सुरक्षा दीवारें बाढ़ में कभी भी धराशायी हो सकती हैं।ग्रामीणों को बाढ़ से बचाने के लिए कुछ समय पूर्व ही टनकपुर की शारदा नदी में 25-25 लाख रुपये की तीन ब्लॉकों का निर्माण शुरू हुआ है। इसके तहत 25-25 मीटर के तीन ब्लॉक तैयार होने हैं। नियमों के मुताबिक ठेकेदारों को क्रशर से ही आरबीएम, रेत और गिट्टी खरीदनी है। लोग आरोप लगा रहे हैं कि ठेकेदार निर्माण कार्यों में अनियमितता बरत रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन तीन कार्यों को चार ठेकेदार मिलकर निपटा रहे हैं। ऊंची पहुंच रुतबे के चलते अधिकारी भी इनपर हाथ डालने से कतरा रहे हैं। लोगों का कहना है कि ठेकेदार दिन में तो काम एकदम सुस्त गति से करवा रहे हैं। सांझ ढलते ही ये लोग पोकलैंड की रोशनी के सहारे निर्माण गुपचुप ढंग से निर्माण कार्य में जुटे हुए हैं। रात के वक्त अस्थाई बिजली का प्रकाश नाकाफी साबित हो रहा है। हालात ये है कि मजूदर मोबाइल की रोशनी के सहारे निर्माण कार्यों में जुट रहे हैं। ये निर्माण कार्य रात करीब 12 बजे तक चल रहे हैं। रात के अंधेरे में ही ठेकेदार नदी से रेत और आरबीएम ही नहीं आसपास की मिट्टी भी पार कर सरकार को लाखों के राजस्व का चूना लगा रहे हैं।

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  • Web Title:Saradha flood protection work was a huge mess