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नेपाल में बंधक बनाए कर्नाटक पुलिस के अधिकारी

बैंक लूटकर नेपाल में छिपे बदमाशों की धरपकड़ को दबिश देने पहुंची कर्नाटक पुलिस की टीम को ग्रामीणों ने घेरकर बंधक बना लिया। आरोप है कि नेपाली नागरिकों ने अपने मुल्क में विदेशी पुलिस कर्मियों से अभद्रता भी की। बाद में सभी पुलिस कर्मियों को नेपाली सुरक्षा एजेंसी के सुपुर्द कर दिया गया। नेपाल पुलिस ने सभी को भारतीय सीमा तक सकुशल छोड़ा। बनबसा थाने के एसओ राजेश पांडेय ने बताया कि पिछले साल 25 जुलाई को कुछ बदमाशों ने कर्नाटक के बलगावी में स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्रा में धावा बोल दिया था। बदमाशों ने गैस कटर की मदद से बैंक की चेस्ट काटकर 14.64 लाख रुपये लूट लिए थे। जांच में सामने आया था कि वारदात में कुछ नेपाली बदमाश भी शामिल हैं। सर्विलांस से मिली लोकेशन के आधार पर 31 मई की रात कर्नाटक पुलिस के उपाधीक्षक शिवापूजे मल्लेशोपरा नागराज और थाना खानपुर के एसआई परशुराम एस पुजरे के नेतृत्व में पुलिस फोर्स ने यूपी के गौरी फन्टा से धनगढ़ी होते हुए नेपाल में प्रवेश किया। टीम ने लोकेशन के आधार पर डोडी जिले के सिलगढ़ी गांव पहुंचकर आरोपी लालजी आहूजी को उसके घर पर घेर लिया। बदमाश के घरवालों की सूचना पर आए ग्रामीणों ने लाठी-डंडों और हथियारों के बल पर कर्नाटक पुलिस की टीम को घेर लिया। आरोप है कि उन्होंने पुलिस के साथ हाथापाई भी की। इससे वहां अफरा-तफरी मच गई। घिरे हुए अधिकारी खुद की पहचान बताते हुए उन्हें छोड़ने का आग्रह कर रहे थे। लेकिन ग्रामीणों ने उन पर रहम नहीं किया। इतना ही नहीं मारपीट के बाद अपहरण की कोशिश का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने पुलिस वालों को नेपाल पुलिस के हवाले कर दिया। नेपाल पुलिस ने तस्दीक के बाद गुरुवार रात कर्नाटक पुलिस को सकुशल भारतीय सीमा तक पहुंचाया। यहां बनबसा पुलिस ने उन्हें रिसीव किया। बाल-बाल बचा बदमाश बनबसा। सूत्रों के मुताबिक नेपाल पहुंचने के बाद कर्नाटक पुलिस ने धनगढ़ी से वाहन बा 16 च 9799 को किराए पर लिया। इसके बाद वह 31 मई को आरोपी लालजी आहूजी के घर डोटि जिले के गांव सिलगढ़ी पहुंचे। रात में जिस समय कर्नाटक पुलिस ने उसके घर पर छापा मारा उस समय आरोपी सो रहा था। बकायदा पुलिस ने उसे हिरासत में भी ले लिया था। ऐन मौके पर ग्रामीणों ने पुलिस कर्मियों को घेर आरोपी को जबरन छुड़वा लिया। इससे पुलिस कर्मियों की जान भी सांसत में पड़ गई थी। नेपाली चालक को भी पीटा बनबसा। नेपाल के ग्रामीण अरोपी के बचाव में इस कदर उतर आए कि उन्होंने न सिर्फ भारतीय पुलिस के जवानों को पकड़ कर नेपाल पुलिस के सुपुर्द किया बल्कि पुलिस को अपने वाहन से आरोपी के घर ले जाने वाले स्कॉर्पियो चालक को भी पकड़ कर डोटि पुलिस के सुपुर्द कर दिया। बताया जा रहा है कि इससे पूर्व उन ग्रामीणों ने नेपाली चालक की जमकर धुनाई भी लगाई। प्रत्यर्पण संधि की हमेशा खलती है कमी बनबसा। नेपाल और भारत के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं है। इसी का फायदा उठाते हुए बड़े-बड़े बदमाश नेपाल में शरण ले लेते हैं। इससे भारत में अपराध कर नेपाल छिपे बदमाशों को भी खूब लाभ मिलता है। वहां के लोग अपराध करके नेपाल भागने वाले नेपाली नागरिकों को बचने का रास्ता भी देते हैं। इस संधि की हमेशा कमी खलती है।

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