DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

हंगरियन कॉमन कार्प मछली बनेगी रोजगार का जरिया

हंगरियन कॉमन कार्प मछली बनेगी रोजगार का जरिया

इंप्रूव्ड हंगरियन कॉमन कार्प मछली अब जिले के मत्स्य पालकों के रोजगार का जरिया बनेगी। शीतजल मत्स्य अनुसंधान केन्द्र छीड़ापानी में इन दिनों इस प्रजाति की मछली की ब्रीडिंग की जा रही है। प्रोटीन और अन्य पोषण तत्वों से भरपूर यह मछली खाने में स्वादिष्ट होने के कारण खासी पसंद की जाती है। सीड्स तैयार होने के बाद इसे स्थानीय मत्स्य पालकों को भी उपलब्ध कराया जाएगा। जिले में अधिकांश मत्स्य पालक सिल्वर कार्प एवं कॉमन कार्फ मछली की तालाबों में पालते हैं। कई जगह ग्रास कार्प भी पाली जा रही है। कम मात्रा में उत्पादन होने से लोकल में पैदा होने वाली मछली बाजार में नहीं मिल पाती। चम्पावत एवं लोहाघाट में ऊधमसिंह नगर जिले से ही मछलियां बाजार में आती है। कृषि विज्ञान केन्द्र सुंई और मत्स्य विभाग की ओर से मत्स्य पालकों को समय-समय पर प्रशिक्षण देने के साथ उन्हें मत्स्य तालाब भी उपलब्ध कराए जाते हैं। लेकिन प्रशिक्षण लेने के बाद अधिकांश मत्स्य पालक इस व्यवसाय को आगे नहीं बढ़ा पाते। चम्पावत के छीड़ापानी स्थित शीतजल मत्स्य अनुसंधान केन्द्र में तैयार किए जा रहे विभिन्न प्रकार के मत्स्य बीज अब स्थानीय मत्स्य पालकों को उनकी जरूरत के मुताबिक उपलब्ध कराए जाएंगे। केन्द्र में रेनब्रोट्राउट प्रजाति के मत्स्य बीज पहले से ही तैयार किए जा रहे हैं। अब इंप्रूव्ड हंगरियन कॉमन कार्प के शीड्स तैयार करने के लिए उनकी ब्रीडिंग कराई जा रही है। केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. अभय कुमार और राघवेन्द्र सिंह ने बताया कि हंगरियन कॉमन कार्प मछली की ब्रीडिंग अप्रैल से जून और जुलाई से अगस्त तक कराई जाती है। बताया कि मत्स्य बीज अमूमन राज्य सरकार के मत्स्य विभाग को दिया जाता है। लेकिन अब स्थानीय मत्स्य पालकों की जरूरत के अनुसार उन्हें केन्द्र से मत्स्य बीज दिया जाएगा। पहले यहां से किसानों को सीमित मात्रा में बीज दिया जाता था। उन्होंने बताया कि हंगरियन कॉमन कार्प मछली विशेष रूप से ठंडे इलाकों के लिए विकसित की गई है। किसान इसे पालकर अपनी आजीविका मजबूत कर सकते हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:हंगरियन कॉमन कार्प मछली बनेगी रोजगार का जरिया