
थराली जनपद गठन की मांग फिर तेज़
संक्षेप: थराली, देवाल और नारायणबगड़ को मिलाकर जिला बनाने की मांग क्षेत्र में बैठक कर
चमोली जिले के थराली विकास खंड में आयोजित बैठक में थराली को जिला बनाने की पुरानी और लगातार उठ रही मांग को नया जोर देने का फैसला किया गया। इस बैठक में एक कार्यकारिणी का गठन किया गया है, जिसमें अध्यक्ष बख्तर सिंह नेगी, महामंत्री डी डी उनियाल, और उपाध्यक्ष डी डी कुनियाल चुने गए। सक्रिय सदस्यों में सामाजिक कार्यकर्ता हीरा सिंह रूपकुंडी, भूधर नेगी, नंदन सिंह रावत, जगदीश प्रसाद थपलियाल, मोहन गिरी, सुभाष पिमोली आदि शामिल हैं। कार्यकारिणी ने प्रस्ताव पारित किया है कि थराली, देवाल और नारायणगढ़ के तीनों तहसीलों को मिलाकर थराली जनपद बनाया जाए। इसके साथ ही संगठन यह भी चाहता है कि थराली विधानसभा क्षेत्र को सामान्य बनाया जाए,जो कि अभी तक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।

इसके लिए अध्यक्ष व महामंत्री को आंकड़े जुटाने की ज़िम्मेदारी दी गई है। जनपद की मांग के पक्ष में तर्क दिया गया कि क्षेत्र में भौगोलिक दूरी और कनेक्टिविटी की चुनौतियां गहरी हैं। थराली से चमोली जिला मुख्यालय (गोपेश्वर) की दूरी लगभग 87 किमी है, जो प्रशासनिक पहुंच को जटिल बनाती है। जनसंख्या के आंकड़े भी इस मांग को मजबूती देते हैं। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार, थराली तहसील की कुल आबादी लगभग 89,114 थी। ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में रहने वाले लाखों लोग वर्तमान व्यवस्था में जरूरी सुविधाओं और सरकारी पहुंच से वंचित महसूस करते हैं। कार्यकारिणी में वक्ताओं ने कहा कि 17 दिसंबर को दूसरी बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें थराली, देवाल और नारायणगढ़ के अन्य लोग शामिल होंगे, ताकि संगठन को और व्यापक आधार दिया जा सके। अध्यक्ष बख्तर सिंह नेगी ने स्पष्ट किया कि जिला गठन की मांग सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि विकास, संवेदनशीलता और ज़रूरतों का प्रतिबिंब है। हमारे लिए यह सिर्फ नाम का बदलाव नहीं, बल्कि जीवन में बदलाव का माध्यम है। यह आन्दोलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कई दशकों से लोग 1985 से इस जनपद की मांग कर रहे हैं, और यह मुद्दा पहले भी अविभाजित उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की विधानसभाओं में उठाया जा चुका है। अब इस नए संगठन और विस्तारित जनाधार के साथ, यह मांग फिर से नई ऊर्जा के साथ सामने आई है।

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