चमोली में जहां टनल धंसने से 7 जिंदा दफन, 6 साल पहले जलप्रलय ने 200 जिंदगियां छीनी; आज भी निकलती हैं लाशें
Chamoli Tunnel Collapse: चमोली में एक और आपदा ने लोगों के जख्मों को हरा कर दिया है। गुरुवार शाम टनल हादसे में सात जिंदा दफन हो गए। 6 साल पहले चमोली में ही भीषण जल प्रलय ने 200 से अधिक जिंदगियां छीन ली थी।

Chamoli Tunnel Collapse: चमोली जिले में पीपलकोटी में अलकनंदा नदी पर टीएचडीसी की निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टनल में भूस्खलन और जल रिसाव के कारण बड़ा हादसा हो गया। इसमें 22 मजदूर फंस गए। 7 मजदूरों की मौत हो चुकी है। जबकि तीन अभी भी टनल में फंसे हुए हैं और उन्हें रेस्क्यू करने का काम चल रहा है। इस हादसे में 14 घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल गोपेश्वर में भर्ती कराया गया है। चमोली में आपदा की यह तस्वीर नई नहीं है। सात महीने पहले इसी टनल में दो लोको ट्रेन टकरा गईं थी। जबकि 6 साल पहले चमोली जिले के नंदा देवी क्षेत्र के पास भंयकर आपदा ने 200 से अधिक जिंदगियां खत्म कर दी थी। उस आपदा में ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट पूरी तरह से तबाह हो गया था और तपोवन-विष्णुगढ़ परियोजना को भी भारी क्षति पहुंची थी।
टनल में काम करने वाले मजदूर बिहार-उड़िसा के
प्रशासन के अनुसार हादसे के वक्त टनल में 22 मजदूर काम कर रहे थे। घायल मजदूरों में ज्यादातर बिहार, उड़ीसा और झारखंड के बताए जा रहे हैं। शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी घटनास्थल पहुंचे। उन्होंने टनल के अंदर जाकर रेस्क्यू अभियान का जायजा लिया और बचाव दलों से जानकारी लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस समेत सभी बचाव दलों को आपसी समन्वय के साथ अभियान तेज करने और उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए। उन्होंने घायलों के बेहतर उपचार और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने को भी कहा।
टनल में हादसा कैसे हुआ
चमोली के डीएम गौरव कुमार ने बताया कि टनल के भीतर भूस्खलन और जल रिसाव के कारण मलबा आ गया। इससे वहां अफरातफरी का माहौल हो गया। एसपी चमोली सुरजीत सिंह पंवार के अनुसार हादसा परियोजना की टनल में करीब 1850 मीटर अंदर हुआ है। लूज क्षेत्र टूटने से मलबे के साथ पानी अंदर आया और टनल का बड़ा भाग दलदल बन गया।
सात की मौत, 3 अभी भी लापता
टनल हादसे में मृतकों में प्रदीप पंवार (31) पुत्र अवतार सिंह, टिहरी गढ़वाल; मुकेश सिंह पुत्र प्रेम सिंह, चमोली; दुर्लभ शर्मा पुत्र भगवानी राम शर्मा, उत्तर प्रदेश; विजय हंसदा पुत्र राम चन्द्र, उत्तर प्रदेश; जितेन्द्र कुमार पुत्र राम चन्द्र, उत्तर प्रदेश; लोकेश्वर पुत्र सोन सिंह पोयम, छत्तीसगढ़ और भुनेश्वर पुत्र सुरेन्द्र कुमार, छत्तीसगढ़ शामिल हैं। वहीं लापता लोगों में लुकास टोप्पनो पुत्र बारसा टोप्पनो, झारखंड; चेतन पोयाम पुत्र सोनधार पोयाम, छत्तीसगढ़ और देवनाथ पुत्र धनसुराम बघेल, छत्तीसगढ़ शामिल हैं।
7 महीने पहले भी इसी सुरंग में टकराई थीं दो लोको ट्रेनें
पीपलकोटी की इसी टीएचडीसी परियोजना की सुरंग में 30 दिसंबर 2025 को भी बड़ा हादसा हुआ था। शिफ्ट बदलने के दौरान मजदूरों और कर्मचारियों को ले जा रही लोको ट्रेन की सामान ढोने वाली लोको ट्रेन से टक्कर हो गई थी। हादसे के वक्त ट्रेन में करीब 110 लोग सवार थे और 88 श्रमिक घायल हुए थे।
2011 ऋषि गंगा जलप्रलय
चमोली में टनल हादसे ने एक बार फिर लोगों के पुराने जख्मों को हरा कर दिया है। 7 फरवरी 2011 को विनाशकारी जलप्रलय ने उत्तराखंड ही नही देश को हिला कर रख दिया था। सरकार ने उस आपदा में 206 मृत प्रमाण पत्र जारी किए थे। जबकि 100 से अधिक लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया। आपदा से बाद से अब तक 38 मानव अंग बरामद हो चुके हैं। उस आपदा के कई भयावह मंजर अभी भी आंखों के सामने जिंदा हैं। एक एक मां की बच्चे से लिपटी लाश मिली थी। इस तरह के कई हृदयविदारक यादें लोगों को आज भी रुलाती हैं।
कैसे आई थी जलप्रलय
7 फरवरी की दोपहर सुहावने मौसम में अचानक ऋषि गंगा में रैंठी ग्लेशियर टूटने से जल प्रलय आई थी। इसमें 13 मेगावाट की ऋषि गंगा जल विद्वुत परियोजना का नामोनिशान मिट गया था। रैंणी वल्ली, पल्ली, पैंग मुरंडा, जुवाग्वाड, जुगजू, सुभांई, तपोवन, ढाक, बडागांव सहित तपोवन जल विद्युत परियोजना के बैराज और टनल में मलबा घुस गया। साथ ही परियोजना के कई भवन, मशीनें सब मलबे की भेंट चढ़ गई। रैंणी में बीआरओ का हेवी मोटेबल पुल, रैंणी पल्ली और जुगजू को जोड़ने वाला पुल, जोंज के अतिरिक्त तपोवन भंग्यूल को जोड़ने वाला पुल बह गया।


