चमोली दर्दनाक हादसे में मां ने खोया बेटा, 4 घरों में मातम; 'देवदूतों' ने 4 जिंदगियां बचाई
चमोली के देवाल में एक कार दुर्घटनाग्रस्त होकर कैल नदी में समा गई। इस हादसे में चार लोगों की जान चली गई। ग्रामीणों ने देवदूत बनकर 4 जिंदगियां भी बचाईं।

चमोली जिले में देवाल-घेस मोटर मार्ग पर एक कार दुर्घटनाग्रस्त होकर कैल नदी में जा गिरी। हादसे में कार में सवार चार लोगों की मौके पर मौत हो गई। हादसे के बाद देवदूत बने ग्रामीणों ने हताहतों को बाहर निकाला, जिससे चार घायलों की जान बच गई। चारों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चार लोगों के लिए देवदूत बनकर आए लौसरी के ग्रामीणों ने बचा लिया। लौसरी के लोग घटना की सूचना मिलते ही वे सबसे पहले मौके पर पहुंचे और बिना किसी रेस्क्यू उपकरण के जान की परवाह किए बिना कैल नदी में कूद पड़े।
पुलिस के मुताबिक, कार में सवार लोग देवाल से घेस गांव जा रहे थे। शाम करीब चार बजे लौसरी गांव के पास कुनार में कार अनियंत्रित हो गई और कैल नदी में जा गिरी। कार पूरी तरह से नदी में डूब गई। कार में सवार अर्जुन सिंह 60 वर्ष पुत्र मानसिंह, आलम सिंह 54 पुत्र दीवान सिंह ग्राम घेस, जानकी देवी 26 वर्ष पत्नी दान सिंह, दीपक सिंह 6 वर्ष पुत्र चंदन सिंह ग्राम खेता मानमती की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, कार चालक हरेंद्र सिंह 38 वर्ष पुत्र पुष्कर सिंह ग्राम घेस, उमा देवी 28 वर्ष पत्नी चंदन सिंह, हर्षिता 8 माह पुत्री चंदन सिंह ग्राम खेता मानमती, खड़क सिंह 38 वर्ष पुत्र मदन सिंह ग्राम घेस गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को एंबुलेंस और प्राइवेट वाहन से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल लाया गया। हरेंद्र की गंभीर हालत को देखते हुए श्रीनगर रेफर कर दिया गया। तहसीलदार अक्षय पंकज, थाना अध्यक्ष विनोद चौरसिया ने बताया हादसे कारणों की जांच की जा रही है।
देवाल में घायलों को बचाने देवदूत बनकर आए लौसरी के ग्रामीण
हादसे में चार लोगों की मौत हो गई और चार लोगों को देवदूत बनकर आए लौसरी के ग्रामीणों ने बचा लिया। लौसरी के लोग घटना की सूचना मिलते ही वे सबसे पहले मौके पर पहुंचे और बिना किसी रेस्क्यू उपकरण के जान की परवाह किए बिना कैल नदी में कूद पड़े। ग्रामीणों को डूबे हुए वाहन से लोगों को निकालने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। नदी का तेज बहाव होने के कारण डूबे वाहन तक पहुंचना ही चुनौती थी। ग्रामीणों ने किसी तरह दरवाजे खोले और घायलों को एक-एक कर बाहर निकाला। कार चालक सहित चार लोगों को काफी मशक्कत के बाद जिंदा बचाया गया। बाद में लौसरी के साथ-साथ फल्दियागांव, घेस, देवाल और देवाल बाजार के ग्रामीण भी सक्रिय रूप से जुटे। उन्होंने घायलों और शवों को नदी से सड़क तक खड़ी चट्टानों पर चढ़ाकर पहुंचाया। कुछ देर बाद सूचना मिलने पर डीडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंची और बचाव कार्य में शामिल हो गई। स्थानीय लोगों की त्वरित कार्रवाई के कारण चार जिंदगियां बच सकीं।
उमा देवी ने बेटा खोया, बेटी लड़ रही जिंदगी की जंग
देवाल-घेस मोटर मार्ग पर सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुई उमा देवी गुरुवार को अपने सात वर्षीय बालक दीपक सिंह और आठ माह की पुत्री हर्षिता को लेकर छुट्टी बिताने अपने मायके घेस गांव जारश रही थी। उसको क्या पता इस सड़क दुर्घटना में अपना लाडला दीपक को खोना पड़ेगा।
मां उमा देवी इस हादसे में जहां बुरी तरह घायल है। उसको हायर सेंटर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया है। उसके साथ उसकी नन्ही बच्ची हर्षिता इस हादसे में घायल हुई है। उमा देवी बार-बार दीपक सिंह को पुकार रही है और उसका रो रो कर बुरा हाल है। वहीं उसको गंभीर चोट लगने से दर्द से कराह रही है। उसे क्या पता था इस हादसे में अपना घर का चिराग लाडला दीपक को खोना पड़ेगा। पुत्र वियोग और गंभीर चोट से वह बहुत आहत है। उमा देवी का मायका घेस गांव में है। उसके पिता रमेश सिंह 55 वर्ष माता लीला देवी 50 वर्ष अपनी पुत्री का व पौत्र पौत्री का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। अब उनका रो रो कर बुरा हाल है।
सड़क हादसे से देवाल क्षेत्र में शोक की लहर
हादसे में 4 लोगों की मौत एवं 4 लोगों के घायल होने की सूचना मिलते ही देवाल क्षेत्र में शोक की लहर छा गई है। इस हादसे पर थराली विधायक भूपाल राम टम्टा ने गहरा दुःख व्यक्त करते प्रशासन से तत्काल बचाव एवं राहत कार्य तेजी के साथ चलने के निर्देश दिए। हादसे पर देवाल प्रमुख तेजपाल रावत, जेष्ठ प्रमुख दीपक गड़िया, भाजपा मंडल अध्यक्ष उमेश मिश्रा, महामंत्री नरेंद्र बागड़ी, भाजपा किसान मोर्चा के ब्लाक अध्यक्ष धर्मेंद्र बिष्ट कांग्रेस ब्लाक अध्यक्ष कमल गड़िया, कांग्रेस नेता महावीर बिष्ट सवाड़ वार्ड के जिला पंचायत सदस्य बलवीर राम आदि ने हादसे पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए दुःख की इस घड़ी को सहने एवं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की।
बदहाल सड़कें, बेहाल अस्पताल बढ़ा रहे दर्द
देवाल सड़क हादसे में बदहाल सड़क ने घायलों और रेस्क्यू में जुटे लोगों का दर्द दोगुना कर दिया। स्थानीय ग्रामीणों ने देवदूत बनकर जान की बाजी लगाकर चार जिंदगियां बचाईं, लेकिन घटनास्थल से देवाल अस्पताल पहुंचने में घंटे भी से ज्यादा लग गया। जबकि मौके से अस्पताल की दूरी महज 17 किलोमीटर थी। बदहाल सड़क होने से घायलों की हालत और बिगड़ी। पूरे रेस्क्यू और अस्पताल पहुंचाने में 1-2 घंटे बीत गए। ऐसे में गंभीर चोट वाले घायलों को अतिरिक्त खतरा झेलना पड़ा। सड़क सही होती तो घायलों को और जल्दी इलाज मिल सकता था।
सड़कें क्यों बदहाल?
देवाल-घेस मार्ग जैसी सड़कों पर चौड़ीकरण, गार्ड रेलिंग और नियमित मरम्मत की कमी सालों से चली आ रही है। मानसून में भूस्खलन, सड़क कटाव और उबड़-खाबड़ रास्ते घायलों को अस्पताल पहुंचाने में घंटों की देरी कर देते हैं। कई बार एंबुलेंस भी समय पर नहीं पहुंच पाती या सड़क बंद होने से वैकल्पिक रास्ते नहीं होते। सड़कों की हालत बेहद खराब है। देवाल में जहां सड़क दुर्घटना हुई वहां भी कई जगह से सड़क टूटी हुई है।
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