हरिद्वार में बुलडोजर ऐक्शन, सड़कों से 105 कब्जे हटाए; सामान छोड़कर भागे लोग

हिन्दुस्तान, हरिद्वार
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हरिद्वार में अतिक्रमण के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है। शुक्रवार को ललतारौ पुल से वाल्मीकि चौक तक अभियान चलाया। इस दौरान सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर अवैध रूप से किए गए 105 अतिक्रमण को हटाया गया। वहीं, कुछ लोग सामान छोड़कर भाग गए।

हरिद्वार में अतिक्रमण के खिलाफ अभियान।
हरिद्वार में अतिक्रमण के खिलाफ अभियान।

हरिद्वार में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और सार्वजनिक मार्गों को अतिक्रमणमुक्त करने के लिए जिला प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। शुक्रवार को नगर मजिस्ट्रेट हर गिरि के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने ललतारौ पुल से वाल्मीकि चौक तक अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर किए गए 105 अवैध अतिक्रमण को हटाया गया है। जबकि कुछ खुद सामान छोड़कर भाग गए।

शुक्रवार को प्रशासन की टीम के पहुंचते ही अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया। कई लोगों ने कार्रवाई से बचने के लिए स्वयं ही सड़क और फुटपाथ पर रखा सामान समेटना शुरू कर दिया। वहीं, जिन स्थानों पर अतिक्रमण नहीं हटाया गया, वहां प्रशासन की टीम ने सख्ती दिखाते हुए अतिक्रमण हटाया। सड़क और फुटपाथ पर सामान रखने तथा सार्वजनिक स्थानों पर कब्जा करने वालों को भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न करने की चेतावनी दी गई।

नगर मजिस्ट्रेट हर गिरि ने कहा कि सार्वजनिक मार्गों और सरकारी भूमि पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शहर की सड़कों, फुटपाथों और सार्वजनिक स्थलों को आमजन के आवागमन के लिए सुगम बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। अभियान के दौरान जिला प्रशासन, नगर निगम की टीम और पुलिस बल मौजूद रहा।

अतिक्रमण के विरोध में प्रदर्शन

अतिक्रमण अभियान के नाम पर लघु व्यापारियों के उत्पीड़न और शोषण के विरोध में शुक्रवार को लघु व्यापार एसोसिएशन ने प्रदर्शन किया। प्रदेश अध्यक्ष संजय चोपड़ा के नेतृत्व में व्यापारियों ने पुराने सभागार से जुलूस निकालते हुए व्यापारी नारेबाजी करते हुए निगम परिसर पहुंचे और एक सूत्रीय मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। संजय चोपड़ा ने कहा कि नगर निगम ने पूर्व में 15 वेंडिंग जोन चिन्हित किए थे, लेकिन केवल तीन ही विकसित किए गए हैं। प्रदर्शन में नीतीश अग्रवाल, कपिल सिंह, नंदकिशोर गोस्वामी, नीरज कश्यप, लालचंद गुप्ता, भोला यादव, विजय कुमार, कपिल कुमार, रवि चौधरी, विक्की, किशोर दास, बिराजपाल, विकास कुमार, राजेंद्र कुमार, कन्हैया, उमेश कुमार आदि शामिल रहे।

खुले नालों पर रखे गए नए स्लैब

नगर निगम ने शुक्रवार से टूटे स्लैब बदलने शुरू कर दिए हैं। शहर के कई इलाकों में नालों पर रखे कंक्रीट स्लैब टूटने से नाले खुले पड़े थे। व्यस्त मार्गों के किनारे खुले नालों से राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों को खतरा बना हुआ था। खबर प्रकाशित होने के बाद नगर निगम अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू कर दी। सबसे गंभीर स्थिति कनखल में सिंहद्वार से प्रेमनगर पुल की ओर जाने वाली सर्विस लेन पर थी। यहां नाले का स्लैब टूटकर भीतर गिर गया था। इससे नाला खुला पड़ा था और सड़क से गुजरने वाले लोगों के उसमें गिरने का खतरा बना हुआ था। नगर निगम ने अब खुले नाले के ऊपर नया स्लैब रख दिया है। अधिशासी अभियंता रचना पायल ने बताया कि शहर में अन्य खुले नालों को भी जल्द ढक दिया जाएगा।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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