Villagers of Bachham declared election boycott - बाछम के ग्रामीणों ने किया लोकसभा चुनाव का बहिष्कार DA Image

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बाछम के ग्रामीणों ने किया लोकसभा चुनाव का बहिष्कार

चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव की तिथि तय कर दी है। इसके बाद जिला निर्वाचन विभाग भी निष्पक्ष और भयमुक्त मतदान कराने की तैयारी में जुट गया है। 1950 टोल फ्री और स्वीप के माध्यम से लोगों को शत-प्रतिश्त मतदान करने के लिए जागरूक कर रहे हैं। इसके इतर आजादी के 72 साल बाद भी कपकोट विधानसभा क्षेत्र के बाछम गांव मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहा है। इसे मुख्य धारा में लाने के लिए राज्यसभा सांसद गांव भी घोषित किया गया, लेकिन हालात नहीं सुधरे। अब ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।

बुधवार को पंचायत घर में ग्रामीणों की बैठक हुई। इसमें ग्रामीणों ने बाछम-पिंडारी पुल से गांतोली तक सड़क, गांव में पोस्ट ऑफिस और सीवीसी बैंक की स्थापना, मोबाइल सेवा देने, देवीकुंड, नाकुंडा, सुंदरढूंगा को छठा धाम घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि गांव को सांसद आदर्श गांव का दर्जा दिया गया है, लेकिन अब भी समस्याएं जस की तस हैं। उन्होंने जूनियर हाईस्कूल बाछम का उच्चीकरण करने और रिक्त पदों पर अध्यापकों की तैनाती की मांग की। कहा कि वर्तमान में विद्यालय में 65 बच्चे पढ़ते हैं। वक्ताओं ने कहा कि राज्य बनने से पहले से लेकर आज तक उन्हें सिर्फ छला गया है। उनके गांव में करीब 1200 वोटर हैं। इसके बाद भी गांव की सुध नहीं ली जा रही है। अब वे कोरे आश्वासन के भरोसे नहीं रहेंगे। भगवत सिंह ने बताया कि अब ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय ले लिया है। बैठक में ग्राम प्रधान आनंद राम, लीला देवी, रतन सिंह, दिगंबर सिंह, चंदन सिंह, तारा सिंह, भगवत सिंह, लोकपाल सिंह, गोविंद राम, भगवत सिंह, धीरेंद्र सिंह, खिमुली देवी, जवाहर सिंह आदि मौजूद रहे।

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इनसेट कोट-

कपकोट विधानसभा के बाछम गांव को गोद लिया है। गांव में विकास कार्य के लिए अपनी निधि से दस लाख रुपये दे दिये हैं। गोद लिए गांवों की केंद्र और राज्य सरकार सुध नहीं ले रही है।

-प्रदीप टम्टा, राज्य सभा सांसद।

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