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हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की गोष्ठी हुई। जिसमें वक्ताओं ने पत्रकारिता के प्रभाव कम होने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में पत्रकारिता का प्रभाव धीरे-धीरे कम हो रहा है। यह प्रवृत्ति पूरे विश्व के लोकतंत्र में व्याप्त हो रही है। जिसका मुख्य कारण बढ़ता उग्रवाद, अधिनायकवाद प्रवृत्ति की विचारधाराएं तथा पत्रकारिता व्यवस्था का निगमीकरण है। इससे ना केवल पत्रकारों का व्यवसाय असुरक्षित हो गया है वरन लोकतंत्र के ढांचे में उनकी आवाज भी धीरे-धीरे कमजोर होते जा रही है। उन्होंने कहा कि आज विश्व में जितनी तेजी से पत्रकारों की हत्या की जा रही है। उसकी तुलना में इन हत्याओं के प्रति क्रोध की अभिव्यक्ति नहीं हो रही है। इससे साफ लगता है कि सरकारें पत्रकारों को सिर्फ संचार का साधन मानने लगी है ना कि लोकतंत्र का प्रहरी। हिंदी पत्रकारिता सामाजिक, राजनीतिक जागरण के जिन उद्देश्यों को लेकर जागृत हुई। लोकतंत्र व पत्रकारिता को बचाने के लिए आम लोग व प्रबुद्ध जन को भी पहल करनी होगी। ताकि देश व विश्व में लोकतंत्रीय माहौल को सशक्त बनाया जा सके। इस मौके पर यूनियन के अध्यक्ष घनश्याम जोशी, चंद्रशेखर द्विवेदी, मनीष पांडे, जगदीश उपाध्याय, दीपक पाठक, फुरकान अहमद, हिमांशु जोशी, महीप पांडे, रईस खान, गोविंद मेहता, पूरन तिवारी आदि मौजूद थे।

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  • Web Title:The effect of journalism is gradually decreasing