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बागेश्वर में हुड़किया बोल के साथ रोपाई की धूम

बागेश्वर में हुड़किया बोल के साथ रोपाई की धूम

पहाड़ों में जून में बारिश के साथ ही खेतों में रोपाई का काम शुरू हो जाता है। इस बार समय से पहले बारिश होने से रोपाई का काम भी शुरू हो गया है। पहले रोपाई में हुड़किया बोल का बोलबाला रहता था, अब यह प्रथा समाप्त होती जा रही है। हालांकि कुछ गांव अब भी हुड़के की थाप पर झोड़ा-चांचरी गाकर रिवाज को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। नगर से सटे बिलौना गांव में हर साल हुड़किया बोल के साथ ही रोपाई की जाती है। ग्रामीणों का मानना है कि हुड़के की थाप पर रोपाई से काम आसान हो जाता है। गानों के बोल और हुड़के से निकलने वाली मधुर ध्वनि थकान का अहसास नहीं होने देती। शुक्रवार से बिलौना में रोपाई का काम शुरू हो गया है। हुड़का वादक किशन सिंह के बोलों के बीच महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से रोपाई का काम शुरू किया। किशन सिंह ने हुड़का बजाने के साथ झोड़ा, चांचरी, भगनौल, बैर आदि लोक गीत गाए। महिलाओं ने उनके सुर में सुर मिलाकर माहौल को संगीतमय बना दिया। हुड़का वादक किशन सिंह ने बताया कि पुराने समय में हुड़का बोल के साथ रोपाई करना आम था। लोगों के पास मनोरंजन के साधन भी कम थे। समय कम होने से लोग काम के साथ मनोरंजन का साधन ढूंढते थे। रोपाई में हुड़का वादक उन्हें पारंपरिक कथाओं को गानों में पिरोकर सुनाता था।

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  • Web Title:Planting with Hoddia Bole in Bageshwar