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केंद्रीय बलों के जवानों को भी मिले शहीद का दर्जा और सेवाएं

केंद्रीय बलों के जवानों को भी मिले शहीद का दर्जा और सेवाएं

पूर्व केंद्रीय बल संगठन ने युद्ध में मारे गए जवानों को सेना की तर्ज पर शहीद का दर्जा और सुविधाएं देने की मांग तेज कर दी है। उन्होंने कहा कि पैरामिलिट्री फोर्स के जवान भी देश के लिए सैनिक की भांति जान देते हैं, लेकिन सरकार की नीतियों से उन्हें शहीद का दर्जा नहीं मिलता है। उन्होंने केंद्रीय बलों को भी समानता का दर्जा देने की मांग की। नुमाइशखेत मैदान में पूर्व पैरामिलिट्री फोर्सेज की बैठक हुई। शुभारंभ मुख्य अतिथि ब्लॉक प्रमुख रेखा खेतवाल और कनिष्ठ प्रमुख सुनीता टम्टा ने किया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाध्यक्ष मोहन सिंह कपकोटी ने संगठन की समस्याओं को रखा। वक्ताओं ने कहा कि देश की सरकार सेना और केंद्रीय बलों को अलग नजरिए से देखती है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बल देश की आतंरिक और सीमा की सुरक्षा में जी-जान से जुटी है। दुश्मन की पहली गोली का सामना भी पैरामिलिट्री के जवानों को करना पड़ता है। कई जवानों ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया है, लेकिन इन सबके बाद भी उसे शहीद का दर्जा नहीं दिया जाता। उसकी सुविधाएं, रहन-सहन, कार्य और कर्तव्य को केंद्रीय सिविल सर्विस से भिन्न हैं। बार्डर पर मारे गए सेना के जवान को शहीद का दर्जा और सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन केंद्रीय बल के जवान को इससे अलग रखा जाता है। उन्हें सेना के जवान की तुलना में बहुत कम पेंशन दी जाती है। उन्होंने कहा कि सेना के हितों के लिए रक्षा मंत्री भी अवाज उठाते हैं, लेकिन केंद्रीय बलों के लिए उच्चधिकारी और सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इससे जवानों के मनोबल पर असर पड़ता है। उन्होंने प्रधानमंत्री से केंद्रीय बलों की समस्याओं का जल्द समाधान करने की गुहार लगाई। बैठक में नारायण सिंह दुबड़िया, नारायण सिंह हरड़िया, लक्ष्मण सिंह कनवाल, एसडी जोशी, रमेश बोरा, रमेश चंद्र उप्रेती, कैलाश चंद्र कांडपाल, भगवती देवी, देवकी देवी, राम सिंह आदि मौजूद रहे।

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  • Web Title:Martyrs' status and services to the Central Forces personnel