विज्ञान को केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रख सकते
बागेश्वर में दो दिवसीय भौतिकी कार्यशाला शुरू हुई है। इसमें 60 से अधिक विज्ञान शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य विज्ञान शिक्षण को सरल और व्यवहारिक बनाना है। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत अनुभवात्मक शिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया गया। छात्रों के लिए भी 21 मई को कार्यशाला आयोजित की जाएगी।
देवेंद्र पांडे, बागेश्वर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में दो दिवसीय “परिवेशीय संसाधन आधारित अनुभवनात्मक भौतिकी कार्यशाला” शुरू हो गई है। कार्यशाला का आयोजन शिक्षा सोपान, कानपुर के सहयोग से किया जा रहा है। पद्मश्री प्रोफेसर एचसी वर्मा ने कहा कि विज्ञान को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जा सकता। जब विद्यार्थी स्वयं प्रयोग करते हैं, तब उनके भीतर जिज्ञासा और खोज की भावना विकसित होती है। कार्यशाला में जिले के विभिन्न विद्यालयों से आए 60 से अधिक विज्ञान शिक्षकों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को कम लागत वाले विज्ञान प्रयोगों और गतिविधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। डायट प्राचार्य चक्षुष्पति अवस्थी ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 के तहत अनुभवात्मक और गतिविधि आधारित शिक्षण समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. भुवन चंद्र ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य विज्ञान शिक्षण को सरल, रोचक और व्यवहारिक बनाना है। उन्होंने बताया कि 21 मई को जिले के विभिन्न विद्यालयों से 100 से अधिक छात्र-छात्राएं भी कार्यशाला में भाग लेंगे। संचालन डॉ. राजीव जोशी ने किया। इस मौके पर भवानी शंकर कांडपाल (केंद्रीय विद्यालय, कौसानी), अनुभव अवस्थी (सोपान आश्रम, कानपुर), विनोद जोशी एवं भुवन मेलकानी ने सुगमकर्ता के रूप में प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. मनोज कुमार पाण्डेय, डॉ. केएस रावत, डॉ. सीएम. जोशी, डॉ. बीडी पांडेय, डॉ. संदीप कुमार जोशी, डॉ. दीपा जोशी, आलोक पांडेय आदि शामिल रहे।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


