मैं जांछू कमला कालि गंगा पारा, त्वेहणी ल्यूल सुनु की हारा गीत में नाचे लोग
धरमघर महोत्सव का रंगारंग समापन हो गया है। महोत्सव के समापन की रात जय बागनाथ लोककला समिति पोखरी बागेश्वर के नाम रही।
देवेंद्र, धरमघर। धरमघर महोत्सव का रंगारंग समापन हो गया। समापन की रात जय बागनाथ लोककला समिति, पोखरी बागेश्वर के नाम रही। ग्रुप ने ‘हाट की कलिका मैया तू दैण है जाए, सबो की तरफ बंदना’ से प्रस्तुति की शुरुआत की। इसके बाद कई पहाड़ी नॉन-स्टॉप गीतों पर रात तीन बजे तक दर्शक झूमते रहे। लोगों ने अपनी फरमाइशें भी पूरी करवाईं। स्टार गायक चंद्र प्रकाश ने एक से बढ़कर एक गीतों से समां बांध दिया। ‘तिलगा तेरी लंबी लटी, टसरा का फुन’, ‘उकाई बज्यूणी हगे, टूटी ज्ञान घुन’, ‘मैं जांछू कमला काली गंगा पारा, त्वेहणी ल्यूल सुनु की हारा’, ‘मेरी गला मुंग की माला सोला सोल्यानी, त्यार गला जंजीर’ जैसे गीतों पर लोग जमकर थिरके।
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