भंडारे के साथ भागवत कथा का समापन
देवेंद्र पांडे, गरुड़। प्रसिद्ध कोट भ्रामरी मंदिर में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का समापन हवन-यज्ञ और विशाल भंडारे के साथ हुआ। यजमानों ने अग्नि में पूर्णाहुति अर्पित की। व्यास पंडित ने कथा का महत्व बताया और धुंधकारी प्रसंग का उल्लेख किया। अंत में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

देवेंद्र पांडे, गरुड़। प्रसिद्ध कोट भ्रामरी मंदिर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का समापन हवन-यज्ञ, पूर्णाहुति और विशाल भंडारे के साथ हुआ। समापन अवसर पर मंदिर परिसर शंखध्वनि, घंटानाद और वैदिक मंत्रोच्चारण से भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। यजमानों ने श्रद्धा और आस्था के साथ अग्नि में सामूहिक पूर्णाहुति अर्पित की। कथा ज्ञान यज्ञ के समापन पर व्यास पंडित जगदीश लोहनी ने कुमाऊंनी भाषा में श्रीमद्भागवत की महिमा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को कथा का महत्व बताया। उन्होंने धुंधकारी प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्ची श्रद्धा और एकाग्रता के साथ कथा श्रवण करने से जीवन का कल्याण होता है।
उन्होंने बताया कि धुंधकारी ने बांस के स्तंभ में बैठकर पूरी निष्ठा से कथा सुनी, जिससे उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई। आरती के बाद महिलाओं ने भजन-कीर्तन प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। अंत में विशाल भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर के पुजारी पप्पू तिवारी, राजेंद्र प्रसाद तिवारी, चंद्रशेखर त्रिपाठी, उमेश चंद्र जोशी, जगदीश खोलिया, कैलाश खुल्बे, विनोद खोलिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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