बदरीनाथ चोरी में गिरफ्तार प्रमोद नौटियाल पर 5 बार बरसी मंदिर की 'कृपा', नए सवाल
बदरीनाथ धाम के चर्चित चढ़ावा चोरी प्रकरण में आरोपी प्रमोद नौटियाल की गिरफ्तारी के बाद जांच निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। आरोप है कि उसे तरक्की देने में नियमों की अनदेखी की गई। पेश है पूरन भिलंगवाल की विशेष रिपोर्ट

बदरीनाथ चढ़ावा चोरी में प्रमोद नौटियाल की गिरफ्तारी किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं रही। आठ जुलाई को मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही वह पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। वह गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था और कानूनी विकल्पों की तलाश में था। रविवार रात अचानक उसकी लोकेशन दून स्थित अपने घर में मिली। रात करीब नौ बजे चमोली पुलिस की एक टीम ने दबिश देकर उसे दबोच लिया।
हाई कोर्ट की शरण से पहले ही गिरफ्तारी
आरोपी की योजना हाईकोर्ट की शरण लेकर गिरफ्तारी पर रोक हासिल करने की थी। इसके लिए वह हाईकोर्ट में अपील कर चुका था और लागातार अपने वकील के संपर्क में था। अगले कुछ दिनों में उसे राहत मिल भी सकती थी। रविवार रात जब पुलिस उसके घर पहुंची तो वह हक्का बक्का रह गया।
प्रमोद पर कब-कब बरसी कृपा
2003 में प्रमोद की संविदा कर्मचारी के रूप में बीकेटीसी में नियुक्ति हुई थी। 2014 में 2800 ग्रेड पे पर स्थायी नियुक्ति के साथ इंटरनेट को ऑर्डिनेटर के पद पर नियुक्ति दी गई। 2017 में प्रमोद को 4600 रुपए ग्रेड पे के साथ बीकेटीसी अध्यक्ष के वैयक्तिक सहायक के पद पर प्रमोश दिया गया। साल 2025 में अध्यक्ष का निजी सचिव बनाया गया। साथ ही प्रोटोकॉल अधिकारी बनाते हुए थाली भेंट गणना कार्य की जिम्मेदारी भी दी गई। अप्रैल 2026 में बदरीनाथ में ड्यूटी दी गई।
अब जांच के घेरे में
प्रमोद नौटियाल की गिरफ्तारी के बाद जांच में घेरे में उसकी नियुक्ति प्रक्रिया, प्रमोशन, सेवा अभिलेख, संपत्ति का ब्योरा, आय से अधिक संपत्ति की जांच शामिल है। साथ ही बड़ा सवाल अभी भी बना हुआ है कि उसे महत्वपूर्ण पदों पर आखिरी नियुक्ति क्यों और किस चैनल से दी गई?
क्या-क्या सवाल उठे
इंटरनेट कोऑर्डिनेटर का पद एकल पद था। इस पर सीधी भर्ती होनी चाहिए थी। बीकेटीसी ने न सिर्फ विज्ञापन निकाला, बल्कि न ही चयन प्रक्रिया अपनाई थी। तीन साल बाद ही प्रमोद नौटियाल को मंदिर समिति ने बड़ा प्रमोशन क्यों दिया? इसके बाद भी कई बार प्रमोद नौटियाल को महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी दी गई।
क्या-क्या काम संभाल रहा था प्रमोद
प्रमोद के पास कई महत्वपूर्ण पद थे। इनमें अध्यक्ष का निजी सचिव, प्रोटोकॉल अधिकारी, थाली भेंट गणना कार्य की जिम्मेदारी और महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य।
जब्त की फुटेज, पूरी अवधि की होगी जांच
पुलिस अब केवल दो जुलाई की घटना तक सीमित नहीं है। 25 और 29 जून की फुटेज में भी आरोपी मोबाइल ट्रिक का इस्तेमाल कर 500 के नोटों की गड्डियां बाहर ले जाता दिखा है। पुलिस ने उसके पास से मंदिर समिति का एक लैपटॉप भी जब्त किया है। केस दर्ज कराने वाले सहित चार गवाहों के बयान दर्ज कर इन सबूतों का मिलान किया जा रहा है। इतने पुख्ता सबूतों के बावजूद सोमवार को जब आरोपी को न्यायालय ले जाया जा रहा था, तब पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उसने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया।
प्रमोद की गिरफ्तारी का सबसे बड़ा आधार वह सीसीटीवी फुटेज है, जिसमें वह बेहद शातिराना तरीके से चोरी करता हुआ कैद हो गया। जांच में पता चला है कि आरोपी ने नकदी और बेशकीमती सामग्री को पार करने के लिए अपने मोबाइल फोन को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया।
मोबाइल में छिपाकर पार करता था 500-500 के नोट
सीओ मदन सिंह बिष्ट और इंस्पेक्टर बदरीनाथ महादेव उनियाल की टीम की जांच के दौरान कब्जे में ली गई फुटेज में दिख रहा है कि प्रमोद अलग-अलग समय पर गणना कक्ष से नकदी निकालता था। वह 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियां बनाता और फिर बड़ी चालाकी से उन्हें अपने मोबाइल फोन की आड़ में कक्ष से बाहर कार्यालय की ओर निकल जाता। फुटेज में वह एक सफेद लिफाफे में रखे 20-25 नोट, सोने-चांदी के सिक्कों के पैकेट, एक शालिग्राम शिला और केसर का पीला पैकेट भी अपनी जेब में रखकर बाहर ले जाता हुआ दिखा है।
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