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बदरीनाथ में -10 डिग्री तापमान में तप करेंगे 27 साधु, वैदिक काल से चली आ रही है परपंरा

बदरीनाथ में -10 डिग्री तापमान में तप करेंगे 27 साधु, वैदिक काल से चली आ रही है परपंरा

संक्षेप:

भगवान बदरी विशाल के कपाट बंद होने के बाद भी हिमालय की तपस्या परंपरा जीवित है, जिसके चलते देश-विदेश के 27 साधु-संतों ने बदरीनाथ धाम में शीतकाल के दौरान रहकर तपस्या करने की अनुमति प्रशासन से मांगी है, जिस पर पुलिस वेरीफिकेशन और सुरक्षा आकलन के बाद फैसला लिया जाएगा।

Nov 29, 2025 06:36 am ISTAnubhav Shakya लाइव हिन्दुस्तान, पूरन भिलंगवाल। ज्योतिर्मठ
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हिमालय की कंदराओं में तपस्या की वैदिक काल से चली आ रही परंपरा आज भी जीवित है। शीतकाल के लिए भगवान बदरी विशाल के कपाट बंद हो चुके हैं, लेकिन आस्था के द्वार खुले हैं। इस बार देश के विभिन्न कोनों और नेपाल के करीब 27 साधु-संतों ने प्रशासन से शीतकाल के दौरान बदरीनाथ धाम में रहकर तपस्या करने की अनुमति मांगी है।

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हालांकि, पहले और अब में यह बदलाव आया है कि पूर्व में जहां साधु-संत तपस्या के दौरान हिमालयी क्षेत्र में मिलने वाले कंदमूल और फलों पर निर्भर रहते थे। वहीं, अब साधु-संत, सूखे मेवे, राशन और गर्म कपड़े आदि साथ रखते हैं।

मोक्षधाम श्री बदरीनाथ जी के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो चुके हैं। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, कपाट बंद होने के बाद बदरीपुरी क्षेत्र में मानव प्रवेश वर्जित माना गया है। इस संदर्भ में स्कन्दपुराण में वर्णन है-‘षड्मासं दैवतैः पूज्या, षड्मासं मानवैस्तथा’ अर्थात यहां (विग्रह/मूर्ति) की पूजा छह महीने देवताओं द्वारा और छह महीने मनुष्यों द्वारा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार, शीतकाल में भारी बर्फबारी के दौरान अब भगवान श्री बदरी विशाल की पूजा देवताओं द्वारा की जाएगी। मान्यता यह भी है कि ब्रह्मर्षि नारद मुनि ने बदरीनाथ में भगवान विष्णु की तपस्या की थी। इस पर उन्हें यह वरदान मिला कि वे नित्य यहां बदरी विशाल की पूजा करेंगे। कपाट बंद होने के बाद नारद मुनि, एक साधु रूप में बदरीनारायण की पूजा करते हैं। उधर, शीतकाल में मंदिर की सुरक्षा का जिम्मा देहरादून आईटीबीपी की तेइसवीं बटालियन के 30 से अधिक जवानों पर रहेगी।

चुनौतियों से निपटने की तैयारी रखते हैं साधु-संत

शीतकाल में बदरीपुरी में रहकर तप-साधना करने की अनुमति मांगने वालों में यूपी, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पंजाब के साथ नेपाल के भी साधु शामिल हैं। मालूम हो कि इन दिनों बदरीनाथ धाम का तापमान रात को माइनस दो तक पहुंच रहा है। दिसंबर के बाद तापमान में भारी गिरावट आती है और यह माइनस 10 तक पहुंच जाता है। भारी हिमपात के दौरान धाम में आठ से दस फीट तक बर्फ जम जाती है। ऐसी विकट परिस्थितियों में यहां रहना चुनौतीपूर्ण रहता है। इसे देखते हुए अब साधु-संत तप के दौरान राशन, सूखे मेवे, गर्म कपड़े और सोलर लाइट आदि जरूरत के सामान की व्यवस्था रखते हैं। उधर, बदरीनाथ के होटलों की सुरक्षा के लिए चौकीदार के रूप में 18 स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से अनुमति देने का अनुरोध किया है।

उपजिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने कहा कि बदरीनाथ धाम में सर्दियों में तप के लिए जिन साधुओं ने अनुमति मांगी है, पहले उनका पुलिस वेरीफिकेशन कराएंगे। धाम में उनके रहने के दौरान सुरक्षा, राशन समेेत जरूरी सामान की उपलब्धता के आकलन के बाद ही अनुमति को लेकर कोई फैसला लिया जाएगा।

Anubhav Shakya

लेखक के बारे में

Anubhav Shakya
भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद जी न्यूज से करियर की शुरुआत की। इसके बाद नवभारत टाइम्स में काम किया। फिलहाल लाइव हिंदुस्तान में बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। किताबों की दुनिया में खोए रहने में मजा आता है। जनसरोकार, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में गहरी दिलचस्पी है। एनालिसिस और रिसर्च बेस्ड स्टोरी खूबी है। और पढ़ें

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