अब अंकिता भंडारी के नाम से जाना जाएगा श्रीकोट राजकीय नर्सिंग कॉलेज, उत्तराखंड सरकार का फैसला
उत्तराखंड में पौड़ी गढ़वाल जिले के डोभ (श्रीकोट) गांव में स्थित राजकीय नर्सिंग कॉलेज का नाम 'स्वर्गीय अंकिता भंडारी राजकीय नर्सिंग कॉलेज' कर दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के सचिव ने बृहस्पतिवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया।

उत्तराखंड में पौड़ी गढ़वाल जिले के डोभ (श्रीकोट) गांव में स्थित राजकीय नर्सिंग कॉलेज का नाम 'स्वर्गीय अंकिता भंडारी राजकीय नर्सिंग कॉलेज' कर दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बृहस्पतिवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया।
सीएम धामी ने बुधवार रात अंकिता के माता-पिता से मुलाकात के दौरान इस बात पर बल देकर कहा था कि सरकार पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। मुख्यमंत्री ने अंकिता के माता-पिता द्वारा पेश किए गए मांगों पर विधि-सम्मत, निष्पक्ष एवं त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिलाते हुए कहा था कि उनकी बेटी को न्याय दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
डोभ गांव की रहने वाली 19 साल की अंकिता की सितंबर 2022 में हत्या कर दी गयी थी। अंकिता, पौड़ी के वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी जहां के मालिक पुलकित आर्य ने अपने दो कर्मचारियों के साथ मिलकर उसे नहर में धक्का दे दिया था। तीनों दोषियों को सत्र न्यायालय से उम्रकैद की सजा मिल चुकी है।
हालांकि, अंकिता हत्याकांड में कथित 'वीआईपी' को लेकर हाल में हुए खुलासों से प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गयी है जहां कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक और सामाजिक संगठन मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराए जाने की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। अंकिता के माता-पिता ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान सीबीआई से मामले की जांच कराए जाने की मांग की है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।
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