
अंकिता भंडारी मामला: आज उत्तराखंड बंद का ऐलान, कांग्रेस की 6 महीने वाली मांग
अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर कुछ सामाजिक संगठनों ने 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का ऐलान किया है। संगठनों ने व्यापारियों और आम जनता से अपील की है कि वे अपनी दुकानें बंद रखकर इस बंद को सफल बनाएं।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर कुछ सामाजिक संगठनों ने 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का ऐलान किया है। देहरादून में एक संयुक्त बैठक में यह फैसला लिया गया कि जब तक इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई से नहीं कराई जाती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने व्यापारियों और आम जनता से अपील की है कि वे अपनी दुकानें बंद रखकर इस बंद को सफल बनाएं। संगठनों का कहना है कि यह लड़ाई उत्तराखंड की अस्मिता और अंकिता को सम्मान दिलाने के लिए है।
संयुक्त संघर्ष मंच बोला जारी रहेगा आंदोलन
अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के मोहित डिमरी ने कहा कि सभी संगठनों ने मिलकर यह तय किया है कि जब तक अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में सीबीआई से नहीं कराई जाती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सभी संगठनों, नेताओं और आम जनता से उत्तराखंड बंद को सफल बनाने की अपील की है। साथ ही व्यापारियों से अनुरोध किया है कि वे अंकिता को न्याय दिलाने के समर्थन में अपनी दुकानें बंद रखें।
व्यापार मंडल ने बंद से किया किनारा
वहीं दून उद्योग व्यापार मंडल ने इस बंद में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। व्यापारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री द्वारा सीबीआई जांच की मंजूरी देने और कानूनी कार्रवाई शुरू होने के बाद अब इस बंद का कोई मतलब नहीं है। यह राजनीति से प्रेरित है। व्यापार मंडल के अध्यक्ष विपिन नागलिया ने कहा कि सरकार ने मांग मान ली है और अपराधी पहले से ही उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। ऐसे में बंद का आह्वान करना व्यापारियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है।
कांग्रेस ने कर दी 6 महीने में CBI जांच पूरी करने की मांग
कांग्रेस ने CBI जांच 6 महीने में पूरी करने को कहा है। महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा ने मांग की कि सीबीआई जांच बिना किसी राजनीतिक दबाव के 6 महीने के भीतर पूरी की जाए। लांबा ने कहा कि हम चाहते हैं कि सीबीआई ‘वीआईपी पहलू’ की स्वतंत्र जांच करे, सबूत नष्ट करने का आदेश देने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो, सबूत नष्ट करने वाले विधायक के खिलाफ कार्रवाई हो और राजनीतिक संरक्षण प्रदान करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाए।
'VIP' का पता लगाने के लिए FIR
वहीं उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि सीबीआई जांच की मांग को लेकर अंकिता के माता-पिता को खुद थाने में एफआईआर दर्ज करानी चाहिए। उस वीआईपी की पहचान को लेकर पूरा उत्तराखंड सवाल पूछ रहा है लेकिन सरकार चुप है। वहीं सीबीआई जांच की सिफारिश के बीच मामले में शामिल कथित 'वीआईपी' का पता लगाने के लिए पुलिस में एक प्राथमिकी दर्ज कराई गई है ।
(पीटीआई-भाषा, एएनआई और यूनीवार्ता की रिपोर्ट के मुताबिक)

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Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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