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अंकिता केस में अब खुलेगा 'VIP' का राज? CBI जांच से सुलझेगा वनंतरा रिसॉर्ट का रहस्य

अंकिता केस में अब खुलेगा 'VIP' का राज? CBI जांच से सुलझेगा वनंतरा रिसॉर्ट का रहस्य

संक्षेप:

अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित 'VIP' के नाम से पर्दा उठाने के लिए सरकार ने सीबीआई जांच की संस्तुति की है। केंद्रीय एजेंसी अब वनंतरा रिसॉर्ट की साजिशों और हालिया वायरल ऑडियो क्लिप के आधार पर नए सिरे से जांच शुरू करेगी।

Jan 10, 2026 06:33 am ISTAnubhav Shakya हिन्दुस्तान, देहरादून
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अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच के बाद कथित वीआईपी के रहस्य से अब पर्दा उठने की उम्मीद जगी है। वीआईपी को लेकर मचे घमासान और अभिनेत्री उर्मिला सनावर की ओर से जारी कथित ऑडियो क्लिप के बाद सरकार ने इस मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी है। पिछले चार महीने में तीन केस सीबीआई को सौंपे गए हैं।

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कई मामलों में पहले से चल रही सीबीआई जांच

उत्तराखंड में पिछले कई मामलों की सीबीआई जांच कर रही है। 2026 में यह पहला मामला है, जो सीबीआई को हैंडओवर करने के लिए सिफारिश की गई है। महज बीते चार महीने में ही अंकिता हत्याकांड ऐसा तीसरा बड़ा मामला है जिसे जनआंदोलन के चलते सीबीआई को सौंपना पड़ा है। इससे पूर्व सितंबर 2025 में यूकेएसएसएससी में हुए पेपर लीक के मामले में युवाओं ने सीबीआई जांच को उग्र आंदोलन किया था। सरकार ने इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का फैसला लिया था। इसी तरह एलयूसीसी कंपनी द्वारा 100 करोड़ से अधिक की ठगी का मामल सामने आया था।

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पूरे प्रदेश में हो रहे प्रदर्शन

पीड़ितों ने धरना-प्रदर्शन एवं लंबा संघर्ष किया तो वह मामला भी सीबीआई के पास गया था। सीबीआई ने जांच के दौरान कुल 46 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था और 18 मुकदमे अलग अलग थानों के इसमें शामिल किए थे। इन दोनों मामलों में पुलिस ने लंबी तफ्तीश की। लेकिन, पीड़ित जांच से संतुष्ट नहीं हुए। अब अंकिता मामले में भी जांच सीबीआई को देकर कथित वीआईपी के नाम का खुलासा होने की संभावना बताई जा रही है। क्योंकि, उत्तराखंड पुलिस अंकिता प्रकरण में ‘वीआईपी’ शामिल होने की बात से इनकार कर चुकी है।

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टूटे रिसॉर्ट में पुराने साक्ष्य ही सहारा

इस घटना का केंद्र पौड़ी जिले में स्थित वनंतरा रिसॉर्ट रहा। अगस्त 2022 में घटना सामने आने पर कार्रवाई की शुरुआत में रिसॉर्ट के बड़े हिस्से पर बुलडोर चला दिया गया था। इसमें साक्ष्य दफन किए जाने के सवाल उठे। सीबीआई को पुलिस जुटाए साक्ष्यों और तकनीकी जांच को परोक्ष बनाकर इस मामले में परिणाम पर पहुंचना होगा। इस मामलों में संदिग्ध लोगों से पूछताछ का दायरा सीबीआई बढ़ा सकती है।

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पुलिस जांच पर क्यों नहीं हो रहा भरोसा

अंकिता केस में पुलिस ने एसआईटी गठित कर चार्जशीट दाखिल की और कोर्ट ने पिछले साल मई में सजा पर फैसला भी सुना दिया था। इसके बावजूद सवाल जस का तस बना रहा आखिर वह वीआईपी कौन है? पुलिस की लंबी जांच से परिजन व अन्य लो संतुष्ट नहीं दिखे हैं। हाल ही में वायरल हुए उर्मिला राठौर के ऑडियो ने दबी हुई इस आग को फिर हवा दे दी। जिसके बाद सरकार को सीबीआई जांच की सिफारिश करनी पड़ी।

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सीबीआई जांच शुरू हुई तो कई लोगों से की जाएगी पूछताछ

अंकिता हत्याकांड की फाइल अब सीबीआई के पास खुलने जा रही है। इस जांच का दायरा सीबीआई के पास बेहद विस्तृत होगा और इसमें सबसे बड़ा फोकस उस वीआईपी की पहचान पर होगा, जिसका नाम अब तक पर्दे के पीछे छिपा हुआ था। भले ही निचली अदालत इस मामले में अपना फैसला सुना चुकी है, लेकिन सीबीआई की जांच से इस मामले में यह देख जाएगा कि कोई अन्य आरोपी तो इस वारदात में शामिल नहीं था।माना जा रहा है कि सीबीआई द्वारा पूरा प्रकरण नए सिरे से खंगाला जाएगा और जांच केवल हत्या तक सीमित नहीं रहेगी। बल्कि इसके पीछे की साजिश, रिसॉर्ट में अनैतिक गतिविधियों के दबाव और कथित वीआईपी को दी जाने वाली 'स्पेशल सर्विस' के एंगल की गहन जांच हो सकती है। अभिनेत्री उर्मिला सनावर के जारी किए गए ऑडियो और उसमें किए गए दावों को भी जांच एजेंसी साक्ष्य के तौर पर परख सकती है।

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इस केस के अनसुलझे सवाल

  • डिजिटल सुबूतों का क्या हुआ? रिसॉर्ट के सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की खबरें आई थीं। क्या डिलीट किए गए फुटेज को पूरी तरह रिकवर किया गया
  • अंकिता का मोबाइल फोन काफी समय बाद मिला। क्या उस फोन से हुई आखिरी चैट्स और लोकेशन डेटा का सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण दिया गया?
  • शुरुआती दौर में जब अंकिता के पिता रिपोर्ट दर्ज कराने गए, तो पटवारी ने टालमटोल क्यों की? क्या उस पटवारी पर किसी का दबाव था?
  • पोस्टमार्टम की शुरुआती रिपोर्ट और अंतिम रिपोर्ट में जो विरोधाभास की बातें सामने आईं, उनकी सच्चाई क्या है? क्या डूबने से पहले अंकिता के साथ मारपीट के निशानों की सही व्याख्या हुई?
  • वनंतरा रिसॉर्ट वन भूमि पर बना था या नहीं? यदि वह अवैध था, तो इतने समय तक प्रशासन ने उस पर कार्रवाई क्यों नहीं की थी?
  • रिसॉर्ट में काम करने वाले अन्य कर्मचारी घटना के तुरंत बाद गायब क्यों हो गए थे? क्या उन्हें डराया-धमकाया गया था?

Anubhav Shakya

लेखक के बारे में

Anubhav Shakya
भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद जी न्यूज से करियर की शुरुआत की। इसके बाद नवभारत टाइम्स में काम किया। फिलहाल लाइव हिंदुस्तान में बतौर सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। किताबों की दुनिया में खोए रहने में मजा आता है। जनसरोकार, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में गहरी दिलचस्पी है। एनालिसिस और रिसर्च बेस्ड स्टोरी खूबी है। और पढ़ें

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