
कृषि में प्लास्टिक इंजीनियरिंग के उपयोग को बनाई शोध योजनाएं
संक्षेप: भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में कृषि में प्लास्टिक इंजीनियरिंग की भूमिका पर आधारित कार्यशाला का समापन हुआ। इसमें 14 सहयोगी केन्द्रों ने भाग लिया। कार्यशाला में अनुसंधान परियोजनाओं की चर्चा की गई और अगले वर्ष के लिए योजनाएं तैयार की गईं। तकनीकों का परीक्षण किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए किया जाएगा।
भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में कृषि में प्लास्टिक इंजीनियरिंग की भूमिका पर आधारित कार्यशाला का समापन हुआ। इसमें कृषि में प्लास्टिक इंजीनियरिंग के उपयोग के लिए अनुसंधान परियोजनाएं तैयार की गईं। भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में ‘कृषि संरचनाओं और पर्यावरण प्रबंधन में प्लास्टिक इंजीनियरिंग पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना की 21वीं वार्षिक कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इसमें 14 सहयोगी केन्द्रों अल्मोड़ा, भुवनेश्वर, लुधियाना, अबोहर (पंजाब), उमियम (मेघालय), जूनागढ़, रांची, श्रीनगर, गंगटोक, उदयपुर, डापोली (महाराष्ट्र), दिरांग (अरुणाचल प्रदेश), मखदूम (उत्तर प्रदेश), रायचूर (कर्नाटक) ने भाग लिया था। कार्यशाला के समापन पर सभी केंद्रों की उपलब्धियों पर चर्चा की गई।

पिछले वर्ष के अनुसंधान की प्रगति पर भी मंथन किया गया। साथ ही आने वाले वर्ष के लिए अनुसंधान योजनाएं भी तैयार की गई। उपमहानिदेशक (अभियान्त्रिकी) भाकृअनुप नई दिल्ली डॉ. एसएन झा ने बताया कि अब इन अनुसंधान परियोजनाओं का दो से तीन साल तक केंद्रों में परीक्षण किया जाएगा। केंद्रों में परीक्षण होने के बाद यह तकनीकें किसानों को हस्तांतरित की जाएंगी। ताकि किसान इनका लाभ उठा सकें। यहां सहायक महानिदेशक (प्रोसेस इंजीनियरिंग) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली डॉ. के नरसैया, डॉ. राकेश शारदा, डॉ. टीबीएस राजपूत, डॉ. एस. पटेल, ई. आनन्द जामब्रे आदि रहे।

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