आपदा के कार्यों में अनियमितता का लगाया आरोप
सूपाकोट के ग्रामीणों ने आपदा राहत कार्यों में लापरवाही का आरोप लगाया है। प्रशासन ने देर से राहत कार्य शुरू किए और निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा। ग्रामीणों ने बीडीओ को शिकायत पत्र भेजा और सुरक्षा दीवारों के निर्माण की मांग की है। 15 महीने तक कोई सुनवाई नहीं हुई।

सूपाकोट के ग्रामीणों ने आपदा के कार्यों में लीपापोती का आरोप लगाया है। कहना है कि एक तो प्रशासन ने आपदा राहत कार्य देरी से शुरू किए। अब निर्माण में लापरवाही बरती जा रही है। रिटायर्ड ऑडिट ऑफिसर रमेश चंद्र पांडे सहित ग्रामीणों ने बीडीओ को शिकायती पत्र भेजा है। कहना है कि तहसील क्षेत्र में मई 2024 को अतिवृष्टि हुई थी। इससे सूपाकोट में प्राचीन नौला जमींदोज हो गया था। इसके अलावा लोगों के घरों में गधेरे का पानी घुस गया था। ग्रामीणों ने नौले की मरम्मत और आवासों को गधेरे से बचाने के लिए दीवार बनाने की मांग की थी।
डेढ़ वर्ष तक ग्रामीणों की कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीणों गांव से लेकर जिला मुख्यालय तक धरना प्रदर्शन किया। इसके बाद डीएम के निर्देश पर बीडीओ ताकुला ने टीम भेज कर आगणन तैयार किया। इसके तहत मनरेगा और वित्त के मद से कार्य शुरू किया गया। आरोप लगाया है कि अब कार्य की गुणवत्ता और मानकों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। सुरक्षा दीवारें सीमेंट के बजाए कच्चे पत्थरों से बनाई जा रही हैं। शिकायत करने पर कच्ची दीवार के बाहर प्लास्टर पोत दिया गया है। उन्होंने प्रशासन से निर्माण कार्यों की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।
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