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पहला परमवीर चक्र और तीन सेनाध्यक्ष देने वाली रेजीमेंट है कुमाऊं

हिन्दुस्तान टीम,अल्मोड़ाPublished By: Newswrap
Sun, 22 Oct 2017 07:50 PM
पहला परमवीर चक्र और तीन सेनाध्यक्ष देने वाली रेजीमेंट है कुमाऊं

कुमाऊं, नागा रेजीमेंट का गौरवशाली इतिहास स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। देश को पहला परमवीर चक्र दिलाने एवं तीन थल सेनाध्यक्ष देने सहित तमाम उपलब्धियां रेजीमेंट के नाम हैं। विभिन्न युद्ध-ऑपरेशनों में रेजीमेंट ने अग्रिम मोर्चों पर रहते हुए साहस, शौर्य व पराक्रम की इबारत लिखी। कुमाऊं रेजीमेंट ने रानीखेत में नागा रेजीमेंट को खड़ा कर नागालैंड वासियों का दिल भी जीता। वर्तमान में देश के विभिन्न हिस्सों में तैनात रेजीमेंट की 21 से अधिक बटालियनें देश और सीमाओं की रक्षा में जुटीं हैं।

कहा जाता है कि कुमाऊं रेजीमेंट की उत्पत्ति हैदराबाद में 1788 में नवाब सलावत खां की रेजीमेंट के रूप में हुई। 1794 में इसे रेमंट कोर व बाद में निजाम कांटीजेंट का नाम दिया गया। इसमें बरार इंफैंट्री, निजाम आर्मी व रसेल ब्रिगेड को मिलाकर हैदराबाद कांटीजैंट बनाई गई। 1903 में इस बल का भारतीय सेना में विलय हुआ। 1922 में पुनर्गठन करके इसे हैदराबाद रेजीमेंट व 27 अक्टूबर 1945 को 'द कुमाऊं रेजीमेंट' का नाम दिया गया और रानीखेत में कुमाऊं रेजीमेंट सेंटर की स्थापना हुई। 4 कुमाऊं रेजीमेंट की डेल्टा कंपनी ने 1948 में कश्मीर के बडगाम में मेजर सोमनाथ शर्मा के नेतृत्व में वीरता के झंडे गाड़े। इस ऑपरेशन में अदम्य साहस का परिचय देते हुए मेजर सोमनाथ ने पाकिस्तानी कबायली हमले का मुंहतोड़ जवाब देते हुए दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए। मरणोपरांत उन्हें देश का पहला परमवीर चक्र मिला। 1962 में लद्दाख व नेफा क्षेत्र में 13 कुमाऊं रेजीमेंट की चार्ली कंपनी ने मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व में चीनी सेना के हौंसले पस्त किए, शैतान सिंह के पराक्रम व वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से नवाजा गया। 1965 व 1971 के युद्धों सहित वर्तमान तक के तमाम युद्ध-ऑपरेशनों में कुमाऊं रेजीमेंट ने अग्रणी मोर्चों पर रहकर देश की सीमाओं की रक्षा की है।

1970 में रानीखेत में नागा रेजीमेंट को खड़ा करना कुमाऊं रेजीमेंट की बड़ी उपलब्धि है, इससे रेजीमेंट ने नागालैंड वासियों का दिल भी जीता। 11 फरवरी 1985 को रानीखेत में ही नागा रेजीमेंट की दूसरी बटालियन खड़ी की गई। कुमाऊं रेजीमेंट ने जनरल एसएम श्रीनगेश, जनरल केएस थिम्मैया व जनरल टीएस रैना के रूप में भारत को तीन थल सेना अध्यक्ष देकर इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया है। वर्तमान में हैं 21 बटालियनकारगिल युद्ध का संचालन कर चुके रक्षा विशेषज्ञ अवकाश प्राप्त ले. जनरल मोहन चंद्र भंडारी ने बताया कि वर्तमान में कुमाऊं रेजीमेंट की 21 बटालियनें हैं। इसके अलावा 3 टीए व 3 राष्ट्रीय राइफल बटालियन भी हैं। कुमाऊं रेजीमेंट के साथ तीसरी बटालियन पैराशूट रेजीमेंट, 4 मैकेनाइज्ड इंफैंट्री, 9 हॉर्स नेवलशिप, आइएनएस खंजर युद्धपोत भी है। वहीं, प्रथम विश्व युद्ध में कुमाऊं रेजीमेंट ने फ्रांस, टर्की, फिलिस्तीन, पूर्वी अफ्रीका व अफगानिस्तान में ख्याति प्राप्त की। द्वितीय विश्व युद्ध में रेजीमेंट की पल्टनों ने मलाया, बर्मा व उत्तरी अफ्रीका आदि देशों में पराक्रम का लोहा मनवाया।

वीरता के पदक बयां करते हैं कुमाऊं रेजीमेंट की गौरव गाथा

रानीखेत। कुमाऊं रेजीमेंट को अब तक वीरता के सर्वोच्च सम्मान 2 परमवीर चक्रों के अलावा 13 महावीर चक्र, 82 वीर चक्र, 4 अशोक चक्र, 10 कीर्ति चक्र, 43 शौर्य चक्र, 6 युद्ध सेवा मेडल, 14 से अधिक परम विशिष्ट सेवा मेडल, 32 से अधिक विशिष्ट सेवा मेडल, 69 से अधिक विशिष्ट सेवा मेडल, 1 अर्जुन पुरस्कार मिल चुके हैं। 220 से अधिक मेंशन इन डिस्पेचेस तथा 734 से अधिक अन्य सम्मान भी रेजीमेंट को मिले हैं, जिनमें दो पद्मभूषण भी शामिल हैं। रेजीमेंट की बटालियनों ने 17 से अधिक यूनिट साइटेशन भी हासिल किए हैं।

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