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कवि सम्मेलन के साथ रानीखेत किताब कौतिक का समापन

रानीखेत किताब कौतिक के समापन पर सोमवार को कवि सम्मेलन के साथ हुआ। रचनाकारों ने रचनाओं से समां बांध दिया। इससे पूर्व गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए...

कवि सम्मेलन के साथ रानीखेत किताब कौतिक का समापन
हिन्दुस्तान टीम,अल्मोड़ाTue, 14 May 2024 11:15 PM
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रानीखेत किताब कौतिक के समापन पर सोमवार को कवि सम्मेलन के साथ हुआ। रचनाकारों ने रचनाओं से समां बांध दिया। इससे पूर्व गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए वयोवृद्ध साहित्यकार डॉ बिशन दत्त जोशी ने वागीश्वरी की वंदना ईजू आज सरस्वति का खुटमा से की।
दिनेश तिवारी ने पहाड़ के हालात पर कहा कि पहाड़ कहां हो रहा है शिफ्ट। प्रीति पंत ने कहा कि ईजा जो बच्चों की चिंता करने‌ वाली..। ज्योति साह ने नारी को प्रकृति की अनुपम देन बताते हुए कहा प्रकृति ने जीवन को सार्थक करने के लिए दो‌ धूरी बनाई,एक पुरुष दूसरी ममतामयी नारी कहलाई..। मिथिलेश मिश्रा ने अब इंसान बिक रहा सुनाया। देवकी नंदन कबडवाल ने दि जगा थान में, छिट्टा भैट ध्यान में..सुनाई। त्रिभुवन गिरी महाराज ने कहा कि शिखर -शिखर है दबे बर्फ़ से, ठिठुर रहे हैं जंगल सारे। संचालन कर रहे साहित्यकर्मी विमल सती, रवि नागर, पुष्पलता जोशी, भावना जोश्शी, डा. प्रवीण, प्रेरणा मेहरा, अंकिता पंत बिष्ट, इमराना परवीन, कैलाश चंद्र, डॉ विनीता खाती‌ आदि ने भी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया, नरेश डोबरियाल, डॉ बीएस कालाकोटी, दया ऐठानी, दिया आर्या, डॉ रिजवाना सिद्दीकी ने भी कविता पाठ किया।

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