ट्रेन को टक्कर! 30 सीटर बस से इतने यात्री निकले गिनती में लग गए 4 घंटे, यूपी से पंजाब जा रही थी
यूपी के लखीमपुर खीरी से पंजाब जा रही बस जब रुद्रपुर में चेक हुई तो परिवहन विभाग के अधिकारी भी सकते में आ गए। 30 सीटर बस में यात्रियों को इतना ठूंसा गया था कि गिनती में ही 4 घंटे लग गए।

ऊपर फोटो देखकर आपको लग रहा होगा कि स्टेशन पर बसों के इंतजार में यात्रियों की भीड़ लगी है, लेकिन यह यात्रियों की भीड़ बसों के इंतजार में नहीं बल्कि एक बस से उतरी है। दूसरे फोटो को भी आप किसी ट्रेन की बोगी समझने की गलती न करें यह लखीमपुर खीरी से पंजाब जा रही 30 सीटर बस है। जिसमें यात्रियों की गिनती करने में ही चार घंटे लग गए।
परिवहन विभाग की कार्रवाई में रुद्रपुर के लालपुर में एक निजी बस में क्षमता से कई गुना अधिक यात्री मिलने से हड़कंप मच गया। लखीमपुर खीरी से पंजाब के विभिन्न शहरों के लिए जा रही बस में 30 स्लीपर और एक सीट की स्वीकृत क्षमता के बावजूद कुल 168 यात्री सवार मिले। इनमें 138 वयस्क और 30 बच्चे शामिल थे। हैरत की बात यह है कि लखीमपुर से 208 किलोमीटर तक बस की कहीं जांच नहीं की गई।
रात 1 बजे बस की चेकिंग हुई
परिवहन कर अधिकारी जितेंद्र सिंगवान ने प्रभारी सुतैया सचल दल के साथ चेकिंग के दौरान लालपुर में रात करीब एक बजे बस को रोका। जांच में बस बिना परमिट और टैक्स के संचालित होने के साथ ही ओवरलोड मिली। परिवहन विभाग ने ओवरलोडिंग, बिना परमिट, बिना टैक्स समेत अन्य अभियोगों में बस का चालान कर उसे रुद्रपुर रोडवेज स्टेशन में सीज कर दिया। यात्रियों को आगे भेजने के लिए परिवहन निगम से वाहन की व्यवस्था कराने को कहा गया, लेकिन किराये को लेकर मामला उलझ गया। निजी बस का किराया यात्रियों से पहले ही लिया जा चुका था और उन्हें रकम वापस नहीं मिली। इसके चलते यात्रियों को आगे की यात्रा के लिए घंटों परेशान होना पड़ा।
लखीमपुर से 208 किमी तक नहीं चेक हुई बस
सबसे बड़ा सवाल यह है कि लखीमपुर खीरी से रुद्रपुर तक करीब 208 किलोमीटर का सफर तय करने के दौरान बस की कहीं जांच क्यों नहीं हुई? 30 स्लीपर और एक सीट की क्षमता वाली बस में 168 यात्रियों को बैठाकर बस लंबी दूरी तय करती रही। बस पंजाब के लुधियाना, खन्ना, जालंधर और अंबाला तक जाने वाली थी। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि रास्ते में पड़ने वाले पुलिस, परिवहन विभाग के चेकिंग प्वाइंट और अन्य संबंधित तंत्र को यह बस क्यों नजर नहीं आई। आखिर किसकी शह पर ऐसी बसें संचालित हो रही हैं? क्षमता से कई गुना अधिक यात्रियों को बैठाकर चल रही बस में बच्चों को भी सफर कराया जा रहा था। यदि रुद्रपुर में परिवहन विभाग की टीम ने बस को नहीं रोका होता तो यह आगे भी इसी तरह यात्रियों को लेकर दौड़ती रहती। तीन दिन में दो निजी बसों में क्षमता से दोगुने से अधिक यात्री मिलने के बाद निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह भी है कि दूसरे जिलों और राज्यों से होकर गुजरने वाली ऐसी बसों में यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
दो अन्य ओवरलोड बसों पर भी कार्रवाई
परिवहन विभाग की टीम ने इसी अभियान के दौरान दो अन्य ओवरलोड बसों के खिलाफ भी कार्रवाई की। विभाग का कहना है कि क्षमता से अधिक सवारियां लेकर चलने वाली बसों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। आमजन से अपील की गई है कि ओवरलोड बसों में यात्रा करने से बचें और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की जानकारी संबंधित विभाग को दें।
यात्रियों की गिनती में लगा चार घंटे का समय
पूरी कार्रवाई के दौरान परिवहन विभाग की टीम को करीब चार घंटे का समय लगा। बस से यात्रियों को बाहर निकालने और उनकी गिनती करने में भी काफी समय लगा। कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई। बस को रोडवेज स्टेशन के अंदर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया, ताकि रात में बस रोके जाने के दौरान यात्रियों को पानी, शौचालय आदि की सुविधा मिल सके।
यात्रियों से 700-800 रुपये लिया था किराया
कार्रवाई के बाद यात्रियों की परेशानी उस समय और बढ़ गई, जब बस संचालक की ओर से उनसे लिए गए करीब 700 से 800 रुपये किराये की वापसी नहीं हो सकी। परिवहन विभाग ने यात्रियों को रुद्रपुर रोडवेज स्टेशन पहुंचाया और परिवहन निगम के अधिकारियों से उनकी आगे की यात्रा के लिए व्यवस्था करने को कहा। रोडवेज अधिकारियों के अनुसार, यात्रियों ने बस का किराया देने में असमर्थता जताई, जिसके चलते उन्हें नि:शुल्क बस से भेजना संभव नहीं हो सका। नतीजतन यात्रियों को अपने स्तर से घर से रुपये मंगाने या अन्य साधनों की व्यवस्था करने के लिए मजबूर होना पड़ा। यात्रियों का कहना था कि बस सीज होने के बाद उन्हें दोबारा किराया जुटाने में परेशानी हुई। देर रात छोटे बच्चों और परिवारों के साथ यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था के लिए भटकना पड़ा।
तीन दिन में दूसरा मामला
विभाग की ओर से ओवरलोड बसों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच तीन दिन में यह दूसरा बड़ा मामला सामने आया है। इससे पहले शनिवार रात किच्छा क्षेत्र में टनकपुर से लुधियाना जा रही जगदंबा ट्रैवल्स की बस में 50 सवारियों की निर्धारित क्षमता के बावजूद करीब 110 यात्री सवार मिले थे। बस का परमिट निरस्त कर दिया गया था।
अधिकारी क्या बोले
एआरटीओ परिवहन कर अधिकारी जितेंद्र सिंगवान ने कहा कि बस का ओवरलोड, बिना टैक्स और बिना परमिट संचालन समेत अन्य अभियोगों में चालान किया गया है। वाहन को रुद्रपुर रोडवेज स्टेशन में सीज किया गया है। यात्रियों के लिए परिवहन निगम से वाहन की व्यवस्था करने को कहा गया था। इस संबंध में निगम अधिकारियों से वार्ता की जाएगी। रोडवेज के सहायक महाप्रबंधक मधुसूदन मिश्रा ने बताया कि एआरटीओ की ओर से यात्रियों को रोडवेज स्टेशन लाया गया था। यात्रियों से बातचीत में उन्होंने रोडवेज का किराया देने में असमर्थता जताई। ऐसे में नि:शुल्क यात्रा की व्यवस्था करना संभव नहीं था। यात्रियों को आगे भेजने की व्यवस्था नहीं हो सकी।


