जिंदगी भर तुम्हारी गुलामी करेंगे...ट्रांसपोर्टर हत्याकांड के आरोपी और डॉक्टर की बातचीत के ऑडियो वायरल
आगरा में जीएसटी अधिकारी की शिकायत करने वाले ट्रांसपोर्टर असगर अली की कार से कुचलकर हत्या कर दी गई। हत्या के बाद आरोपी फरार हो गए। इस मामले में आरोपी और जीएसटी अधिकारी के पति के बीच हो रही बातचीत के तीन ऑडियो वायरल हुए हैं।

Agra News: आगरा में जीएसटी अधिकारी की शिकायत करने वाले ट्रांसपोर्टर असगर अली की कार से कुचलकर हत्या कर दी गई। हत्या के बाद आरोपी फरार हो गए। इस मामले में आरोपी और जीएसटी अधिकारी के पति के बीच हो रही बातचीत के तीन ऑडियो वायरल हुए हैं, जिसने हत्याकांड में नया मोड़ ला दिया है। एक तरफ आरोपी रवि यादव है और दूसरी तरफ जीएसटी अधिकारी निवेदिता सिंह के पति डॉ. अजय कुमार यादव के होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि हिन्दुस्तान ऐसे किसी भी ऑडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं कर रहा है। डॉ. अजय नगर निगम में पशु कल्याण अधिकारी हैं। आवाज डॉ. अजय यादव की है यह पुष्टि फोरेंसिक जांच में ही होगी। उनका कहना है कि ऑडियो एआई की मदद से बनाए गए हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस ऑडियो को दूसरे मोबाइल से वीडियो बनाकर रिकार्ड किया गया है। ऑडियो के अनुसार कथित डॉ. बोल रहे हैं रवि भाई पूरा जीवन ऋणी रहेंगे। एक घंटे की बात है। कोर्ट में खड़ा होना है। खड़े-खड़े जमानत हो जाएगी। जिंदगी भर तुम्हारी गुलामी करेंगे। तुम्हारे पैर धोकर पीएंगे। पति-पत्नी जिंदगी भर जो बोलोगो तुम्हारा वह काम करेंगे। हम फ्रॉड लोग नहीं है। ऑडियो में वह रो रहे हैं।
ऑडियो में कोर्ट और नाम लेने की चर्चा
वायरल ऑडियो में दो लोगों के बीच लंबी बातचीत सामने आई है। इसमें एक व्यक्ति दूसरे से कोर्ट और मजिस्ट्रेट के सामने उसका नाम लेने की बात कहता सुनाई दे रहा है। बातचीत में “डॉक्टर का नाम ले लेना”, “जिसका नाम लेना हो ले लेना” और “मैं गारंटी दे रहा हूं” जैसे शब्द भी बोले गए हैं। दूसरा व्यक्ति फैसले को लेकर सवाल उठाते हुए खुद पर दबाव बनाने का आरोप लगाता है। ऑडियो में भावनात्मक बातचीत और सफाई देने की कोशिश भी साफ सुनाई देती है।
कुर्बानी मुझसे क्यों दिलवा रहे हो
रवि यादव कहता है कि वह भी रातभर रोया है। एक घंटे के लिए खड़े होने में मेरी पूरी लाइफ खराब हो जाएगी। पूछे बिना यह निर्णय लिया किसने। उसे इसमें शामिल क्यों नहीं किया। मेरी तो उससे कोई दुश्मनी नहीं थी। दूसरी तरफ वाला व्यक्ति सफाई देता है निर्णय मैने नहीं लिया। रवि कहता है कोर्ट जाओ। स्टे लो। दूसरी तरफ वाला व्यक्ति कहता है पूरी संपत्ति लिखकर देने को तैयार हैं। कोर्ट में खड़े-खड़े जमानत हो जाएगी। मजिस्ट्रेट खड़ा भी रखे तो मेरा नाम ले देना। ऑडियो में रवि यह भी कहता है कि साफ-साफ बतो दो गाड़ी भाई चला रहा था। आप भी उसमें बैठे थे। कुर्बानी मुझसे क्यों दिलवा रहे हो। रवि यादव अपने घर की परेशानी का जिक्र करता है। कहता है कि उसकी पत्नी और माता-पिता पूरी रात रोए हैं। उसे बुखार है। दूसरी तरफ वाला व्यक्ति उसे मिलने बुलाता है। कहता है बैठकर बात होगी। तीन ऑडियो में लंबी बातचीत है। रवि यह भी कहता है कि घटना के बाद उनके साथ मुरैना, नोएडा गया। उस पर प्रेशर क्यों दे रहे हैं।
बेहद शातिर है आरोपी रवि यादव
रवि यादव बेहद शातिर है। पुलिस से बचने के लिए हर तरीका अपनाता है। जो ऑडियो वायरल हुए हैं वे व्हाट्सएप कॉल पर बातचीत के नहीं है। बातचीत के लिए इंटरनेट कॉलिंग एप डाउनलोड किया गया। जिसकी लोकेशन पुलिस को आराम से नहीं मिलती है। ऐसे कॉल को पुलिस वीओआईपी कॉल कहती है। आरोपित को पता है कि पुलिस व्हाट्सएप से उसकी लोकेशन निकाल सकती है, इसलिए यह तरीका अपनाया गया है। पुलिस वीडियो के स्क्रीन शॉट देखकर यह समझ गई। ऑडियो में हुई बातचीत के कुछ अंश। तीन ऑडियो में लंबी बातचीत है। इस मामले में डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया पुलिस को तीन ऑडियो मिले हैं। उनकी सत्यता की जांच कराई जाएगी। डॉक्टर अजय और रवि दोनों की आवाज के नमूने लिए जाएंगे। फिलहाल पुलिस को रवि यादव की तलाश है। ऑडियो में डॉ. अजय की ही आवाज है इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
ट्रांसपोर्टर हत्याकांड में रवि और कामरान पर घोषित होगा इनाम
ट्रांसपोर्टर असगर अली हत्याकांड में पुलिस ने कामरान वारिसी को आपराधिक षड्यंत्र का आरोपित बनाया है। जल्द फरार चल रहे रवि यादव और कामरान वारसी पर पुलिस इनाम घोषित कर सकती है। दोनों की तलाश को पुलिस की टीमें बनाई गई हैं। दबिश दी जा रही है। ट्रांसपोर्टर हत्याकांड में सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि मुकदमे में दो नाम खोले गए हैं। रवि यादव और कामरान वारसी। दोनों मीडिया कर्मी हैं। कामरान वारसी के खिलाफ पुलिस को पूर्व में भी कई गोपनीय शिकायतें मिली थीं। जिसमें यह आरोप लगाए गए थे कि फतेहाबाद मार्ग पर वह होटल संचालकों को परेशान करता है। बड़े होटलों के खिलाफ वीडियो वायरल करके उनके जीएम को दबाव में लेता है। वहीं पुलिस को जानकारी मिली है कि यह गैंग जीएसटी ऑफिस में भी सक्रिय था। इसमें एक और मीडिया कर्मी शामिल है। रवि यादव ने सबसे पहले उसी के पास ऑडियो भेजे थे। डर की वजह से उसने उन्हें वायरल नहीं किया।
पथौली से बरामद की गई कार
पुलिस ने घटना में प्रयुक्त कार को शाहगंज में पथौली के पास जंगल से बरामद किया है। 112 नंबर पर सूचना मिली थी कि एक कार लावारिस खड़ी हुई है। शाहगंज पुलिस मौके पर पहुंची तो कार वही निकली जिससे वारदात हुई थी। पुलिस के अनुसार यह कार पहले अरुण के नाम थी। उसने प्रेम नारायण को कार बेची थी। अरुण और डॉ. अजय कुमार यादव सगे भाई हैं। प्रेम नारायण हरीपर्वत क्षेत्र में संचालित एक गोशाला में कर्मचारी था। घटना की रात क्या हुआ यह तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है।
क्या है पूरा मामला
मेवाती गली, भोगीपुरा निवासी असगर अली को चार अप्रैल 2026 की सुबह कार से उड़ाया गया था। उनके बेटे डॉ. सजमन अली ने मुकदमे में जीएसटी अधिकारी निवेदिता सिंह उनके पति अजय कुमार यादव, दिनेश सोलंकी, रवि यादव, कामरान वारिसी पर साजिश का शक जाहिर किया था। पुलिस ने एक्सीडेंट की धारा में मुकदमा लिखा था। पिछले दिनों मुकदमा हत्या की धारा में तरमीम किया गया था। रवि यादव को आरोपित बनाया गया था। उसकी लोकेशन घटना स्थल पर थी। जिस गाड़ी से टक्कर मारी गई थी वह प्रेम नारायण के नाम थी। जांच में खुलासा हुआ था कि वह गोशाला पर कर्मचारी है। नौकर है। यमुनापार निवासी रवि यादव घटना के बाद से फरार है। उसकी पत्नी ने तीन ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
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लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
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पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो
उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


