
युवक ने हनुमान चालीसा की चौपाइयों को तस्वीरों में उकेरा, भक्ति और कला का अद्भुत संगम
बरेली के नीरज आनंद ने भक्ति और कला का अद्भुत संगम पेश किया है। उन्होंने तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा को चित्रों के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत कर भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता को नई दिशा दी है। हर चौपाई को उन्होंने भावनाओं, प्रतीकों और रंगों के माध्यम से इस तरह उकेरा है।
महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नीरज आनंद ने भारतीय भक्ति साहित्य की अमर कृति हनुमान चालीसा को एक अनूठे और भावपूर्ण चित्रात्मक रूप में प्रस्तुत कर एक अद्भुत उदाहरण पेश किया है। यह प्रयास न केवल कलात्मक दृष्टि से बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हनुमान चालीसा, महाकवि तुलसीदास द्वारा रचित 40 चौपाइयों का भक्ति-स्तोत्र है। मान्यता है कि इसे पढ़ने से संकटों का निवारण, मन की शांति और आत्मबल की वृद्धि होती है। नीरज आनंद ने इसी चालीसा को दृश्य माध्यम के जरिए जीवंत किया है। उनकी इस चित्रकला में प्रत्येक चौपाई और दोहे को बहु-आयामी चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है, जो न केवल शब्दों का अर्थ बल्कि भाव, दार्शनिक गहराई और आध्यात्मिक संदेश भी दर्शाता है।
नीरज आनंद ने महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी। तकनीकी शिक्षा ने उन्हें अनुशासन, सटीकता और व्यवस्थित दृष्टिकोण प्रदान किया। इसके बाद उन्होंने विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के व्याख्याता के रूप में भी कार्य किया। वर्तमान में होम डिलीवरी सहयोगी के रूप में कार्य करते हुए, उन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य कला और भक्ति के माध्यम से समाज और संस्कृति के लिए योगदान देना बनाया।

चौपाइयों को इस तरह से चित्रों में उकेरा
उदाहरण स्वरूप, ‘जुग सहस्त्र जोजन पर भानु, लील्यो ताहि मधुर फल जानू’ को उन्होंने बाल हनुमान द्वारा सूर्य को ग्रहण करने और तीनों लोकों में व्याप्त अंधकार को दर्शाते हुए चित्रित किया है। इसी प्रकार, ‘अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता’ जैसी चौपाई को हनुमान जी को भक्तों को सिद्धियां और निधियां प्रदान करते हुए दिखाया गया है।
प्राचीन ज्ञान को आधुनिकता से जोड़ने का किया काम
महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय का कहना है कि यह उनके लिए यह गौरव की बात है कि उनके एक पूर्व छात्र ने अपनी तकनीकी और सृजनात्मक क्षमता का उपयोग कर भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण और प्रसार में योगदान दिया। ‘सचित्र हनुमान चालीसा’ केवल एक कला-कृति नहीं, बल्कि प्राचीन ज्ञान को आधुनिक माध्यम से जोड़ने और भक्ति के मार्ग को सरल, सुगम और हृदयस्पर्शी बनाने वाला एक सेतु है।
सुंदरकांड और रामचरितमानस को भी चित्रात्मक स्वरूप देने की योजना
नीरज आनंद का यह प्रयास केवल एक चित्रकला नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और भक्ति की जड़ें युवा पीढ़ी और दृश्य माध्यमों से सीखने वाले लोगों तक पहुंचाने का एक प्रयास है। उनका मानना है कि चित्रों की सार्वभौमिक भाषा दिव्य संदेश को अधिक प्रभावशाली ढंग से संप्रेषित कर सकती है। भविष्य में वे रामचरितमानस, सुन्दरकाण्ड और अन्य भक्ति ग्रंथों को भी इसी प्रकार चित्रात्मक स्वरूप देने की योजना बना रहे हैं।





