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मोबाइल पर देख सकेंगे अपने खेत और घर, योगी सरकार आम लोगों को देने जा रही बड़ी राहत

मोबाइल पर देख सकेंगे अपने खेत और घर, योगी सरकार आम लोगों को देने जा रही बड़ी राहत

संक्षेप:

यूपी के लोग जल्द ही अपने खेत और घर के नक्शे मोबाइल फोन पर देख सकेंगे। इसके लिए एप्लीकेशन यानी एप तैयार कर लिया गया है। जनवरी से पहले यानी अगले ही माह इसे लांच करने की तैयारी हो गई है। इससे जमीन को लेकर विवाद भी नहीं होंगे। 

Nov 26, 2025 05:41 am ISTYogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान
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यूपी की योगी सरकार आम लोगों को बड़ी राहत देने वाली है। नागरिकों को जल्द ही मोबाइल के माध्यम से अपना खेत व घर देखने की सुविधा मिलेगी। राजस्व परिषद ने मोबाइल एप्लीकेशन (एप) तैयार किया है। जनवरी से पहले इसे लांच करने की तैयारी की जा रही है। परिषद द्वारा सेटेलाइट की मदद से घरों व खेतों के नक्शे तैयार कराए जा रहे हैं।

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नक्शों का काम पूरा होने के बाद मोबाइल एप पर गाटा संख्या, खतौनी व खसरा संख्या डालकर लोग आसानी के साथ अपने खेत, घर, गांव व मोहल्ले की सटीक तस्वीर देख सकेंगे। राज्य में 57,694 ग्राम पंचायतें हैं और एक लाख से ज्यादा राजस्व ग्राम हैं। एप के जरिए नक्शों को देखने की सुविधा आनलाइन उपलब्ध होने के बाद विवाद नहीं होंगे। एप पर हर घर और खेत का रकबा भी इस प्रदर्शित होगा।

यूपी में निजी औद्योगिक पार्क बनाना हुआ अब और आसान

उत्तर प्रदेश में निजी क्षेत्र में औद्योगिक पार्क बनाना अब और भी आसान हो गया है। सड़कों की चौड़ाई का मानक कम कर दिया गया है। अब सात मीटर चौड़ी सड़कों के किनारे भी निजी औद्योगिक पार्कों की स्थापना की जा सकेगी।

अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास आलोक कुमार ने अधिसूचना जारी कर दी है। इसके मुताबिक़ 12 मीटर चौड़ी सड़क की जगह सात मीटर कर दिया गया है। सात मीटर चौड़ी सड़कों के किनारे बनने वाले निजी औद्योगिक पार्कों में ग्रीन व आरेंज श्रेणी की औद्योगिक इकाईयों की ही स्थापना की जा सकेगी। अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 12 मीटर चौड़ी सड़कों के किनारे बनने वाले निजी औद्योगिक पार्कों में हर श्रेणी की औद्योगिक इकाईयां स्थापित की जा सकेंगी।

अधिसूचित क्षेत्रों में औद्योगिक पार्कों का नक्शा विकास प्राधिकरण द्वारा पास किया जाएगा। संबंधित जिलाधिकारी के मूल्यांकन के बाद औद्योगिक पार्क को एक इकाई मानकर स्टांप शुल्क लिया जाएगा। विकास प्राधिकरणों द्वारा अधिसूचित क्षेत्र में स्थापित होने वाले औद्योगिक क्षेत्रों से 25 प्रतिशत विकास शुल्क वसूला जाएगा।

अधिसूचित क्षेत्रों के बाहर विकास शुल्क नहीं लिया जाएगा। 10 से 50 एकड़ में निजी औद्योगिक पार्कों के आंतरिक विकास के लिए 50 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से एक प्रतिशत ब्याज पर प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।