36 की उम्र में बूढ़ी हो गई महिला, 10 साल तक लेती रही वृद्धावस्था पेंशन; अब खुली पोल
इटावा में वृद्धावस्था पेंशन का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जहां 46 साल की महिला सरकारी रिकॉर्ड में 69 साल की बुजुर्ग बनकर पिछले 10 साल से पेंशन ले रही थी। जब 2015 में उसकी पेंशन लागू हुई, तब उसकी वास्तविक उम्र महज 36 साल थी।

UP News: यूपी के इटावा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां एक 46 साल की महिला पिछले दस सालों में से वृद्धावस्था पेंशन ले रही है। उसने अपनी उम्र 69 साल दिखाकर पेंशन ले ली, जबकि पेंशन शुरू होने के समय उसकी आयु 36 साल थी। जब इस मामले की शिकायत हुई, सत्यापन किया गया, तब पूरी पोल खुली। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि अब तक पेंशन के रूप में जितनी रकम ली है उसकी वसूली की जाए।
बढ़पुरा ब्लाक के ग्राम पंचायत विचारपुरा का ग्राम पंचायत में पेंशन लाभार्थियों का सत्यापन कराया गया। जब वैरिफिकेशन चल रहा था। तभी ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मुकेश कुमार को इस लाभार्थी महिला उमा देवी पत्नी शिवराज सिंह के अपात्र होने की जानकारी मिली। महिला के परिवार रजिस्टर की नकल और आधार कार्ड की प्रति देखी गई तो उस महिला उम्र इस समय में 46 साल है। इस महिला की पेंशन साल 2015 में स्वीकृत की गई थी। उस समय उसकी उम्र 36 साल थी। अब सत्यापन की रिपोर्ट के साथ जिलाधिकारी के माध्यम से जिला समाज कल्याण अधिकारी को शिकायत दी गई है।
अपात्र महिला के पेंशन लेने की शिकायत के बाद समाज कल्याण विभाग ने बताया है कि साल 2025-26 के वार्षिक सत्यापन में सचिव की रिपोर्ट के आधार पर शिवराज सिंह की पत्न उमा देवी को अपात्र पाया गया है। उनकी पेंशन तत्काल प्रभाव से रोक दी गई है। प्रधान प्रतिनिधि मुकेश कुमार ने विभागीय कार्यवाही पर असंतोष जताया है। उन्होंने कहा कि विभाग ने केवल पेंशन रोककर खानापूर्ति कर ली है, पिछले 10 सालों में अपात्र महिला को दी गई। वहीं, इस मामले में जिला समाज कल्याण अधिकारी, संध्यारानी बघेल ने बताया कि मामले की शिकायत मिलने के बाद संबंधित महिला की पेंशन रोक दी गई है। मामले की जांच एडीओ समाज कल्याण बढ़पुरा वीरेश कुमार को सौंपी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
किन डॉक्यूमेंट्स के आधार पर मिल रही थी पेंशन
अब जांच में यह स्पष्ट होना है कि महिला ने किन दस्तावेजों के आधार पर वृद्धावस्था पेंशन हासिल की और करीब दस वर्षों तक हुए सत्यापन में उसकी अपात्रता सामने क्यों नहीं आई? यदि जांच में अपात्र व्यक्ति को सरकारी धन के भुगतान की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय करने और धनराशि की वसूली की कार्रवाई भी महत्वपूर्ण होगी।
वहीं, मामले के सामने आने के बाद जिले में वृद्धावस्था पेंशन योजना के लाभार्थियों के सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। यह भी जांच का विषय होगा कि कहीं जिले में ऐसे अन्य अपात्र लाभार्थी तो योजना का लाभ नहीं ले रहे हैं।


