संसद की समिति में उठेगा क्रिकेटर सरफराज को टीम में न लेने का मामला, सपा सांसद बर्क का दावा
क्रिकेटर सरफराज खान को घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद भी टीम इंडिया में नहीं लेने के मामले में विवाद और बढ़ गया है। संभल से सपा के सांसद जियाउररहमान बर्क ने इस मामले को संसद की खेल समिति में उठाने का दावा कर दिया है।

घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन के बावजूद क्रिकेटर सरफराज खान को भारत की ए टीम में शामिल न किए जाने को लेकर उपजे राजनीतिक विवाद के बीच संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउररहमान बर्क ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि अगर यह पाया गया कि सरफराज को धर्म के आधार पर बाहर रखा गया है तो वह इस मुद्दे को संसद की खेल संबंधी स्थायी समिति (Standing Committee for Sports) में उठाएंगे। इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सपा सांसद ने कहा कि यह नहीं होना चाहिए कि अगर किसी का प्रदर्शन अच्छा है इसके बाद भी सिर्फ धर्म के आधार पर हटाना हमारे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा।
दरअसल यह विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि क्या सरफराज खान को उनके सरनेम खान की वजह से क्रिकेट टीम से बाहर रखा गया है। सरफराज खान को हाल ही में घोषित दक्षिण अफ्रीका ए के खिलाफ होने वाले दो प्रथम श्रेणी मैचों के लिए इंडिया ए टीम के स्क्वाड में भी शामिल नहीं किया गया था, जबकि घरेलू क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली है।
सांसद बर्क ने जोर देकर कहा कि ऐसा कभी नहीं रहा कि किसी एक विशेष धर्म के लोगों ने ही देश का गौरव बढ़ाया हो। उन्होंने कहा कि हर धर्म और जाति के लोगों ने हमेशा देश के लिए खेला है और देश का सम्मान बढ़ाया है। इसमें हमारे मुस्लिम समाज के लोगों का भी हमेशा से रोल रहा है। मैं उम्मीद करता हूं कि कभी ऐसा नहीं होना चाहिए कि किसी का परफार्मेंस अच्छा हो और उसे सिर्फ धर्म के आधार पर टीम में नहीं लिया गया हो। मैं प्रयास करूंगा कि ऐसा कुछ हुआ है तो इस बारे में पता करूंगा कि उन्हें क्यों नहीं लिया गया है।
इस मामले पर राजनीति भी गरमा गई है। भाजपा ने कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस पर 'गंदे राजनीतिक सांप्रदायिक एजेंडे' को क्रिकेट से दूर रखने को कहा है। घरेलू क्रिकेट में सरफराज खान का प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में काफी बेहतरीन रहा है, जिसके चलते राष्ट्रीय चयन समिति के इस फैसले पर व्यापक बहस और सोशल मीडिया पर आक्रोश देखने को मिल रहा है।

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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