
संभल के 47 साल पुराने दंगे की फाइल फिर खुलेगी? योगी के निर्देश पर प्रशासन की रिपोर्ट तैयार
सीएम योगी ने संभल के 47 साल पुराने दंगे की फाइल फिर खोलने की बात कही थी। इसी के बाद संभल प्रशासन ने 1978 में हुए दंगे पर रिपोर्ट तैयार कर ली है और शासन को भेजने की तैयारी की जा रही है। संभल में एएसपी ने रिपोर्ट तैयार कर एसपी को सौंपी है।
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 47 साल पुराने संभल दंगे की फाइल खोलने की बात पिछले दिनों कही थी। इसी के बाद संभल में 1978 में हुए सांप्रदायिक दंगे की जांच रिपोर्ट एक बार फिर से तैयार की गई है। प्रशासन ने उसे शासन के पास भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अपर पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह ने दंगे की प्राप्त सूचना और साक्ष्यों की विस्तृत आख्या तैयार कर एसपी को सौंप दी है। एसपी रिपोर्ट के सभी बिंदुओं की कानूनी और तथ्यात्मक जांच कर रहे हैं, जिसके बाद इसे शासन को भेजा जाएगा।
इस रिपोर्ट को तैयार करने में प्रशासन को सबसे बड़ी चुनौती पुराने साक्ष्यों और गवाहों की तलाश रही। दंगों के सही अभिलेख 47 वर्षों में गायब हो गए। कोतवाली में सुरक्षित मिले एक पुराने रजिस्टर में केवल 9 मौतों का जिक्र मिलता है। उधर, जिन परिवारों पर कथित अत्याचार हुए, उनमें से कई या तो पलायन कर चुके हैं या उनके परिजन अब नहीं रहे, जिसके चलते गवाह जुटाना कठिन रहा। रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि 1978 के दंगे में 169 अभियोग 169 लोगों ने लिखाए थे, जिसमें 500 लोग नामजद और सैकड़ों लोग अज्ञात थे। इनमें से आठ अभियोग सपा सरकार में वापस ले लिए गए थे। अन्य अभियोगों में तीन लोगों को न्यायालय से दोषमुक्त कर दिया गया था।
इस मामले को दिसंबर 2024 में विधान परिषद सदस्य श्रीचंद्र शर्मा ने विधानसभा में उठाया था। उन्होंने सदन में दिए गए वह तथ्य जिनमें उन्होंने दंगे के दौरान दर्जनों हिंदुओं को जिंदा जलाए जाने, सैकड़ों की हत्या होने और उनके घर-दुकानों पर कब्जा किये जाने की बात कही थी। जिस कारण उन्होंने दंगे की रिपोर्ट मांगी थी। पूर्व में एएसपी श्रीश्चंद्र ने रिपोर्ट तैयार की थी, जिसे एसपी के माध्यम से शासन में भेजा गया था, लेकिन शासन ने रिपोर्ट में कुछ और बिंदुओं को शामिल कर पुन: आख्या मांगी थी, जिसके बाद अब एएसपी कुलदीप सिंह ने न्यायालय, थानों से मिले कुछ रिकॉर्ड के आधार पर पुन: रिपोर्ट तैयार कर एसपी को सौंप दी है।
सीएम ने भी 1978 के दंगे की फाइल फिर खोलने की कही थी बात
सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी 1978 के दंगे की फाइल खोलने की बात कही थी। यह रिपोर्ट अगर शासन तक पहुंचती है तो संभव है कि दशकों बाद दंगे से जुड़े घर-दुकानों के कब्जे, पीड़ित परिवारों के पुनर्वास और दोषियों की कानूनी जवाबदेही जैसे मुद्दों पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो सके। 47 साल पुराने मामले में न्याय की संभावनाएं अब इस रिपोर्ट पर टिकी हैं, लेकिन सवाल यह भी है कि क्या इतिहास के इतने पुराने जख्म आज भी सबूत देने की स्थिति में हैं? प्रशासन रिपोर्ट तैयार करके अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है पर असली फैसला तो शासन ही लेगा।
संभल के पुलि सअधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई के अनुसार रिपोर्ट शासन को भेजने से पहले उसका बिंदुवार अवलोकन किया जा रहा है। दंगे के तथ्य गंभीर हैं। इन पर बारीकी से जांच की जा रही है। इसलिए एक भी बिंदु बिना पुष्टि के आगे नहीं भेजा जाएगा। सभी बिंदुओं की जांच होने के बाद यह रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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