क्या नोटों का भी प्राइवेटाइजेशन हो जाएगा? RBI के टेंडर पर अखिलेश ने उठाए सवाल, BJP को कोसा
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने RBI के BRBNMPL के पॉलिमर शीट टेंडर पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने पूछा कि क्या अब नोटों का भी निजीकरण होगा। साथ ही टेंडर प्रक्रिया पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए। वहीं, यह फिलहाल पॉलिमर नोटों की शुरुआती तैयारी का हिस्सा है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) द्वारा पॉलिमर शीट की खरीद के लिए जारी टेंडर को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर सवाल उठाया कि क्या अब देश के नोटों का भी निजीकरण किया जाएगा। अखिलेश यादव ने लिखा कि भ्रष्ट भाजपा शासन में कमीशनखोरी का मॉडल इस हद तक पहुंच गया है कि अब नोटों के निजीकरण की आशंका पैदा हो रही है।
आरबीआई के टेंडर पर अखिलेश ने उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि जब देश की मुद्रा ही आत्मनिर्भर नहीं होगी तो अर्थव्यवस्था और देश कैसे आत्मनिर्भर बनेंगे। उन्होंने यह भी तंज कसा कि क्या अब सरकार भी आउटसोर्सिंग पर दे दी जाएगी। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि इतने संवेदनशील कार्य के लिए छोटा टेंडर जारी करना संदेह पैदा करता है और कहीं यह केवल औपचारिकता पूरी करने का प्रयास तो नहीं है।
RBI ने ग्लोबर टेंडर जारी
दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक की नोट छापने वाली कंपनी BRBNMPL ने पॉलिमर आधारित नोटों के लिए आवश्यक पॉलिमर शीट के निर्माण और आपूर्ति हेतु वैश्विक कंपनियों से रुचि की अभिव्यक्ति (EOI) आमंत्रित की है। यह कंपनी मैसूरु और सालबोनी स्थित प्रेसों में भारतीय मुद्रा की छपाई करती है। इस पहल को पॉलिमर नोटों की दिशा में शुरुआती तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। इस ग्लोबल टेंडर के जरिए अंतरराष्ट्रीय बिडर्स को देश के लिए पॉलीमर सबस्ट्रेट बनाने और उसकी आपूर्ति करने के लिए आमंत्रित किया गया है। EOI के तहत बोली जमा करने की अंतिम तिथि 18 अगस्त तय की गई है।
शुरुआती दौर में 10-20 रुपए के नोट
खबरों के मुताबिक शुरुआती दौर में इस प्रायोगिक प्रोजेक्ट के तहत केवल 10 रुपये और 20 रुपये के ही पॉलीमर नोट जारी किए जाने की संभावना है। जिसके बाद में अन्य मूल्यवर्ग के पॉलीमर नोट भी जारी हो सकते है। इन प्लास्टिक नोटों में एडवांस सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जाएंगे, जिससे नकली नोटों पर लगाम लगाने में बड़ी मदद मिलेगी। ये नोट पेपर करेंसी के मुकाबले ज्यादा समय तक चलेंगे और जल्दी फटेंगे नहीं। हालांकि, इस प्रक्रिया का यह अर्थ नहीं है कि जल्द ही पॉलिमर या प्लास्टिक के नोट प्रचलन में आ जाएंगे। फिलहाल यह केवल शुरुआती चरण है। किसी भी निर्णय से पहले परीक्षण, तकनीकी मूल्यांकन और अन्य आवश्यक औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।


