अखिलेश की ताकत बढ़ेगी या टेंशन? 23 महीने बाद जेल से निकलेंगे सपा महासचिव आजम खां

अखिलेश की ताकत बढ़ेगी या टेंशन? 23 महीने बाद जेल से निकलेंगे सपा महासचिव आजम खां

संक्षेप:

समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खां के 23 महीने बाद जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। कहा जा रहा है कि एक दो दिन में वह जेल से बाहर होंगे। उनके बाहर आने से पहले ही उनकी रिहाई के बाद सपा को होने वाले फायदे-नुकसान पर चर्चा तेज हो गई है।  

Sep 18, 2025 06:31 pm ISTYogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान
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समाजवादी पार्टी के महासचिव और यूपी के कद्दावर नेता आजम खान 23 महीने बाद जेल से बाहर आएंगे। गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्वालिटी बार जमीन पर अवैध कब्जे के मामले में दर्ज केस में भी जमानत दे दी। आजम के वकील मोहम्मद खालिद के मुताबिक आजम को इससे पहले सभी मामलों में जमानत मिल चुकी है, दो-तीन दिनों में उनके जेल से बाहर आने का प्रोसेस पूरा हो जाएगा और वह बाहर आ जाएंगे। आजम खां का जेल से बाहर आना पहली नजर में तो सपा की ताकत बढ़ाने वाला नजर आता है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे अखिलेश की टेंशन बढ़ाने वाला भी मान रहे हैं। इसके पीछे मजबूत तर्क भी है।

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आजम खां एक तरफ पार्टी के मुस्लिम वोटबैंक के सबसे बड़े चेहरे हैं। रामपुर और आसपास ही नहीं यूपी के सभी मुस्लिम बहुल जिलों में उनके समर्थकों की बड़ी तादात है। 2022 में जब वे पहली बार जेल से बाहर आए थे, तब अखिलेश यादव ने खुद ट्वीट कर उनका स्वागत किया था। अखिलेश ने लिखा था कि झूठ के लम्हे होते हैं, सदियां नहीं। उस वक्त सपा को विधानसभा चुनावों में थोड़ा फायदा भी हुआ था। उस समय आजम के समर्थकों ने पार्टी को मजबूती दी थी। अब विशेषज्ञों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले आजम के जेल से निकलने पर सपा का मुस्लिम-यादव गठजोड़ मजबूत होगा।

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अब अगर टेंशन की बात करें तो आजम खां की सीट रामपुर में सपा ने लोकसभा चुनाव में मोहिबबुल्लाह नकवी को उतारा और उन्होंने वह जीतकर सांसद भी बने। मोहिबबुल्लाह की गिनती आजम खां के आलोचक मे होती है। मोहिबबुल्लाह की उम्मीद्वारी का ऐलान होने पर ही कहा जा रहा था कि अखिलेश यादव ने सीधे आजम खां को उनके ही इलाके में चुनौती दे दी है। जेल से आजम ने एक पत्र भी तब जारी कर पूरे इंडिया गठबंधन पर हमला बोला था। इसमें कहा गया कि वे मुस्लिम नेतृत्व को खत्म करने की साजिश रच रहे हैं। इसी बीच मार्च 2024 में अखिलेश ने जेल में जाकर आजम से मुलाकात की लेकिन इसके बाद भी तनाव बरकरार रहा। आजम की पत्नी तंजीन भी जब सपा का सवाल आता है या सपा के आजम के साथ होने का सवाल आता है तो कहती हैं कि अब उन्हें किसी पर भरोसा नहीं है। अब केवल अल्लाह पर भरोसा है।

विश्लेषक कहते हैं कि जेल से बाहर आने के बाद अगर आजम किसी तरह की बगावती बातें नहीं करते तो सपा को फायदा होगा। लेकिन अगर वह इसके उलट कुछ कर देते हैं तो पार्टी का वोट बैंक बंट सकता है। आजम के जल्द रिहा होने की खबर आने के बाद से सोशल मीडिया पर तरह तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि अभी तक अखिलेश यादव या सपा के किसी बड़े नेता का कोई बयान नहीं आया है। माना यह भी जा रहा है कि आजम के जरिए सपा भाजपा को घेरने की कोशिश भी करेगी। जेल से बाहर आते ही आजम खां सीधे रामपुर पहुंचेंगे। समर्थकों ने उनके स्वागत की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।

योगी सरकार बनने के बाद लगातार दर्ज हुए केस

यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के साथ ही आजम खां और उनके परिवार के खिलाफ केस दर्ज होना शुरू हो गए थे। अकेले आजम के खिलाफ करीब 90 केस दर्ज हुए। 2017 में योगी के मुख्यमंत्री बनने से लेकर 2019 के बीच उनके खिलाफ ज्यादातर केस दर्ज हुए। उनकी गिरफ्तारी भी हुई। फिर सभी मामलों में जमानत के बाद 20 मई 2022 को आजम खां जेल से बाहर आए। करीब एक साल से कुछ अधिक समय बाहर रहने के बाद एक बार फिर 2023 में जेल गए तो अभी तक जेल में ही हैं।

18 अक्टूबर 2023 से जेल में

रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने 18 अक्टूबर 2023 को आजम खां, उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम को सात-सात साल की सजा सुनाई थी। इसी के बाद कोर्ट से ही तीनों को रामपुर जेल भेज दिया गया था। बाद में पत्नी और बेटे को जमानत मिल गई थी। आजम के खिलाफ कई मामले होने से जेल से बाहर नहीं आ सके थे। जेल जाने के एक हफ्ते बाद ही उन्हें गृह जिले रामपुर की जेल से सीतापुर जेल शिफ्ट कर दिया गया था। तब से सीतापुर जेल में ही बंद हैं।