पत्नी ने 15 हजार में मंगाया था जहरीला सांप, दो दिन तक रखा भूखा फिर पति के बेड पर छोड़ दिया
मेरठ में सांप से डंसवार पति को मारने वाली पत्नी को लेकर पुलिस ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पुलिस ने बताया कि पत्नी दामिनी जिस सांप से अतुल को डंसवाया है, उसे 15 हजार रुपये में मंगवाया गया था। इंटरनेट पर सांप की विशेषता देखने के बाद सपेरे को फोटो देकर उसे मंगवाया गया था।

Meerut News: मेरठ में प्रेमी के लिए पति को सांप से डसवाकर मौत के घाट उतारने वाली पत्नी दामिनी को लेकर कई खुलासे हुए हैं। दामिनी ने अतुल पवार की हत्या के लिए कई माह से प्लानिंग की थी। इंटरनेट पर उसने सबसे जहरीले सांप को लेकर सर्च किया था। करैत सांप के बारे में पता चलने के बाद उसकी खासियत और बाकी जानकारी भी जुटाई थी। पता चला कि ये सांप रात को शिकार पर निकलता है और अक्सर घरों में घुसकर बिस्तर पर चढ़ जाता है। ऐसे में दामिनी और तुषार ने अपनी साजिश के लिए यही सांप सटीक पाया।
तुषार ने इसकी फोटो इंटरनेट से डाउनलोड की। यही फोटो तुषार ने अपने साथियों सोनू और उदय को दिखाकर कहा था कि बस यही सांप चाहिए। इसके लिए सपेरे को देने के लिए 15 हजार रुपये भी दिए। करीब सात दिन में सपेरा कहीं से ये सांप पकड़कर लाया। तुषार और दामिनी ने सांप मिलने के बाद योजना को अंजाम देने की तैयारी की। दो दिन तक सांप को भूखा रखा गया और फिर गुरुवार रात को अतुल के बेड पर सांप छोड़ दिया गया। करैत सांप ने अतुल को डस लिया और उसकी मौत हो गई।
करैत की विशेषता देखकर दामिनी ने मंगाया था ये सांप
पुलिस ने अतुल पवार हत्याकांड में दामिनी, तुषार, सोनू और उदय से अलग अलग पूछताछ की। खुलासा हुआ कि दामिनी को अतुल की हत्या करने के लिए सांप से डसवा देने का रास्ता सबसे आसान लगा। उन्हें एक ऐसा सांप चाहिए था तो घर में घुस जाता हो और जहरीला भी हो। इसके लिए दामिनी ने गूगल से जानकारी भी जुटाई। इसी दौरान कोबरा, करैत और वाइपर का विवरण मिला। उसने पढ़ा कि करैत ही ऐसा सांप है जो काफी जहरीला भी है और रात में सक्रिय होता है। करैत भोजन और गर्मी की तलाश में घरों में भी घुस जाता है और सोए व्यक्ति को काट भी लेता है। ऐसी घटनाएं ग्रामीण इलाके में होती भी रही हैं, इसलिए इसी सांप को लाने की योजना बनाई गई। ये भी पता कराया गया कि हस्तिनापुर इलाके में ये सांप पाया जाता है या नहीं।
सांप डंसवाने से पहले पति को दी थी नींद की गोलियां
तुषार ने अपने दोस्त सोनू और उदय से संपर्क किया तो दोनों ने बताया कि कोबरा और करैत दोनों ही सांप जंगल में मिल जाएंगे। इसके बाद दामिनी ने 15 हजार रुपये सोनू और उदय को दिए और करैत सांप लाने का जिम्मा दिया। एक अन्य सपेरे की मदद से सोनू और उदय ने करीब 15 दिन में करैत को खोज निकाला और पकड़कर लाए। सपेरे ने बताया कि यदि लापरवाही बरती तो ये सांप किसी को भी डस लेगा। गुरुवार को अतुल को दूध में दामिनी ने 10-12 नींद की गोलियां देकर सुला दिया। इसके बाद तुषार को कॉल किया और वह सांप लेकर आया। देर रात किसी समय दामिनी ने इस सांप को अतुल के बिस्तर पर खुद ही छोड़ दिया था। इसके बाद भूखे सांप ने अतुल को डस लिया और तुरंत ही उसकी मौत हो गई।
कोबरा से भी जहरीला है करैत
करैत सांप कोबरा से भी ज्यादा खतरनाक और जहरीला माना जाता है। इससे साइलेंट किलर भी कहते हैं, चूंकि इसके काटने पर कई बार आदमी को पता नहीं चलता कि किसी सांप ने डस लिया है। करैत का जहर कोबरा की तुलना में चार गुना तक ज्यादा जहरीला माना जाता है। इसका जहर सीधे तंत्रिका तंत्र और सांस की मांसपेशियों को प्रभावित करता है। कोबरा के काटने पर दर्द, सूजन और जलन होती है, लेकिन करैत के काटने पर ऐसा कुछ नहीं होता। ऐसे में सोते हुए व्यक्ति को पता नहीं चलता कि सांप ने डस लिया है। इसलिए भी ज्यादा खतरनाक माना जाता है।
सांप पकड़ने वाले को खोज रही पुलिस
पुलिस सूत्रों की मानें तो सांप पकड़ने में एक अन्य सपेरे ने सोनू और उदय की मदद की थी। इसके लिए सोनू और उदय ने रकम भी आरोपी को दी थी। अब पुलिस उस सपेरे को खोज रही है। वहीं, इस केस में पुलिस ने आरोपियों के बयान की रिकार्डिंग की है। दूसरी ओर, सभी के मोबाइल फोन साक्ष्य रूप में सील किए गए हैं और फोरेंसिक लैब भेजे जा रहे हैं।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
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हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
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उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


