FIR में केंद्रीय मंत्री के नाम में मिस्टर क्यों नहीं लगाया, पुलिस पर भड़क गया हाई कोर्ट

Nisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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कोर्ट ने कहा, 'उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव (गृह), लखनऊ अपने हलफनामे में यह समझाएंगे कि एफआईआर (FIR) में माननीय केंद्रीय मंत्री, जिनका नाम वहां दर्ज है, उनके नाम के साथ 'माननीय' जैसे सम्मानजनक शब्दों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया है।

FIR में केंद्रीय मंत्री के नाम में मिस्टर क्यों नहीं लगाया, पुलिस पर भड़क गया हाई कोर्ट

FIR में केंद्रीय मंत्री के नाम के आगे मिस्टर या माननीय नहीं लगाने को लेकर अदालत में पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पुलिस से कहा है कि अगर शिकायतर्ता न भी कहे, तो भी पुलिस को टाइटल लिखना जरूरी है। हालांकि, इस मामले में केंद्रीय मंत्री आरोपी नहीं हैं, लेकिन पुलिस में दी गई शिकायत में उनका नाम शामिल है।

बार एंड बेंच के अनुसार, केंद्रीय मंत्री के नाम के आगे Mr या Honorable नहीं लिखने को लेकर अदालत ने पुलिस से जवाब मांगा है। एक याचिका पर सुनवाई कर रही जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की बेंच ने राज्य के गृह सचिव को इस मामले में जवाब देने के लिए कहा है। याचिका में धमकाने और भरोसा तोड़ने के मामले में दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की गई थी।

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क्या बोले जज

कोर्ट ने कहा, 'उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव (गृह), लखनऊ अपने हलफनामे में यह समझाएंगे कि एफआईआर (FIR) में माननीय केंद्रीय मंत्री, जिनका नाम वहां दर्ज है, उनके नाम के साथ 'माननीय' जैसे सम्मानजनक शब्दों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया है। यहां तक कि एक जगह तो उनका नाम बिना 'मिस्टर' लगाए ही लिख दिया गया है।'

कोर्ट ने आगे कहा, 'भले ही लिखित रिपोर्ट में शिकायतकर्ता ने माननीय मंत्री का नाम ठीक से न लिखा हो, लेकिन एफआईआर दर्ज करते समय यह पुलिस की जिम्मेदारी थी कि वे प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सम्मानजनक शब्द जोड़ते, भले ही वे शब्द ब्रैकेट में लिखे जाते।'

क्या है आरोप

इस मामले में मंत्री आरोप नहीं है, लेकिन एफआईआर में नाम का जिक्र है। शिकायतकर्ता के आरोप हैं कि नौकरी दिलाने के नाम पर आरोपी ने 80 लाख रुपये ले लिए थे। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस को दी गई शिकायत में बताया गया है कि इसके बाद पैसा नहीं लौटाया गया और जान से मारने की धमकी भी दी गई थी। FIR रद्द करने की याचिका पर 6 अप्रैल को सुनवाई की जाएगी।

हनीट्रैप मामलों पर हाई कोर्ट ने दिए पुलिस को निर्देश

हाई कोर्ट ने हनीट्रैप में शामिल गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा, 'यदि इस तरह का गिरोह या कोई अन्य गिरोह भी काम कर रहा है और महिलाओं के जरिए हनीट्रैप में फंसाकर निर्दोष लोगों को ब्लैकमेल कर रहा तो पुलिस महानिरीक्षक कड़ी निगरानी बनाए रखने को सभी जिलों के पुलिस प्रमुखों को अलर्ट करें। यदि इस तरह के अपराध जारी रहते हैं तो एक सभ्य दुनिया में रहना मुश्किल हो जाएगा।'

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि बिजनौर में एक होटल में एक महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने के बाद उसे आरोपियों ने उसे ब्लैकमेल किया था। उस महिला ने कुछ वीडियो क्लिप रिकॉर्ड किए गए थे। आरोपियों ने इस मामले को निपटाने के लिए 8-10 लाख रुपये की मांग की थी।

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लेखक के बारे में

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निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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