यूपी में जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों की उम्मीदों को क्यों झटका? जुलाई में खत्म होगा कार्यकाल
यूपी में जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों को बढ़ाए जाने की उम्मीदों को झटका लगा है। हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने पर नाराजगी जताई। इसके बाद पंचायती राज विभाग बैकफुट पर है।

यूपी में हाईकोर्ट की ओर से ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने पर जताई गई नाराजगी और उठाए गए सवाल के बाद पंचायती राज विभाग बैकफुट पर है। इससे जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल बढ़ाए जाने की उम्मीदों को झटका लगा है। 11 जुलाई को जिला पंचायत अध्यक्षों व 19 जुलाई को ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है।
हाईकोर्ट त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए जाने को लेकर सख्त है और प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने पर उसने नाराजगी जताई है। अब अगली सुनवाई 13 जुलाई को होनी है। उससे पहले 11 जुलाई को जिला पंचायत अध्यक्षों का पांच साल का कार्यकाल खत्म हो जाएगी। वहीं ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल भी 19 जुलाई को खत्म हो रहा है। फिलहाल ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को खत्म होने से पहले ही उन्हें प्रशासक बनाए जाने के आदेश जारी कर दिए गए थे। जिस पर अब हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद अब पंचायती राज विभाग आगे की सुनवाई में अपना पक्ष मजबूती से रखने की तैयारी कर रहा है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर इस प्रकरण पर विधिक राय लेकर आगे विभाग का पक्ष मजबूती के साथ रखे जाने की बात कह रहे हैं। फिलहाल त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची भी पहले ही जारी की जा चुकी है।
हाईकोर्टने कल प्रशासक कार्यकाल बढ़ाने के आदेशों पर असंतोष जताया
आपको बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को टालने और प्रधानों का बतौर प्रशासक कार्यकाल बढ़ाने के आदेशों पर असंतोष जताया है। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243ई के तहत पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष के लिए निश्चित है और किसी भी हाल में पांच साल खत्म होने से पहले अगले चुनाव संपन्न हो जाने चाहिए। राज्य सरकार कोई अध्यादेश या कानून लाकर चुनाव को पांच साल से आगे नहीं बढ़ा सकती। कोर्ट ने कहा कि सरकार के दोनों आदेश संविधान के विपरीत हैं इसलिए ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में पद पर बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याचिका में राज्य सरकार के गत 25 व 26 मई के उन आदेशों को चुनौती दी गई है, जिसके तहत यूपी पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 12(3-ए) का हवाला देकर चुनाव टाल दिए गए और प्रधानों को प्रशासक के रूप में काम जारी रखने की अनुमति दी गई है। सुनवाई के दौरान ने कोर्ट को बताया गया कि वर्ष 2000 में प्रेम लाल पटेल के मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच पहले ही इस धारा को संविधान के अनुच्छेद 243ई और 243के का उल्लंघन मानते हुए असंवैधानिक करार दे चुकी है।


