
कफ सिरप बनाने वालों पर एक्शन क्यों नहीं? वीडियो के जरिए सामने आया शुभम जायसवाल
नशीली कफ सिरप के मामले में मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल शुक्रवार को वीडियो के जरिए सामने आया। पूछा कि अगर कफ सिरप में कोई गड़बड़ी है तो इसे बनाने वाली फैक्ट्री और उसके मालिकों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। कहा कि इस कफ सिरप से किसी बच्चे की एमपी या राजस्थान में मौत नहीं हुई है।
नशीली कफ सिरप के कारोबार में मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल ईडी का शिकंजा कसते ही वीडियो के जरिए सामने आया है। उसने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया है। उसने कहा कि वह केवल कफ सिरप का सप्लायर है। अगर कफ सिरप में कोई गड़बड़ी है तो इसे बनाने वाली फैक्ट्री और उसके मालिकों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। शुभम जायसवाल ने इस कफ सिरप से किसी बच्चे की एमपी या राजस्थान में मौत की बातों को भी गलत बताया है। शुभम ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को उसके खिलाफ दुष्प्रचार नहीं करने की अपील की है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। ईडी ने गुरुवार को ही शुभम के घर पर नोटिस चस्पा किया था।
शुभम ने कहा कि कफ सिरप को लेकर तरह-तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं। बहुत से नेता इसे लेकर बयानबाजी कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि मैंने जहरीली सिरप बेची है। बच्चों की मौत हो गई है। यह सारी बातें झूठ हैं। कुछ अधिकारी मुझे फंसाने के लिए यह सब कर रहे हैं। अन्य लोगों को बचाने का काम किया जा रहा है।
मेरे कफ सिरप से बच्चों की मौत नहीं हुई
शुभम ने कहा कि कफ सिरप को पीकर मध्य प्रदेश और राजस्थान में बच्चों की मौत हुई, वह बच्चों के लिए बनाए जाने वाला कफ सिरप था। जिस कफ सिरप की सप्लाई हम कर रहे थे, वह सरकार से दस्तावेज देकर पास कराई गई थी और वह सिर्फ एडल्ट्स के लिए थी। इसका मध्य प्रदेश और राजस्थान की घटना से कोई लेना देना नहीं है।
कुछ कागजात और दवाइयां दिखाते हुए कहा कि यह है फैंसडल कफ सिरप। यह एबर्ट हेल्थ केयर का आता है। एबर्ट हेल्थ केयर एक मल्टीनेशनल कंपनी है। फैंसी कप सिरप ना ही प्रतिबंधित है ना ही जहरीली है ना ही किसी भी तरह की नारकोटिक श्रेणी में आती है। मेरे पास इससे रिलेटेड सभी डॉक्यूमेंट्स हैं। यह एक सामान्य श्रेणी की दवा है। इसको कफ होने पर यूज़ करते हैं।
एक कफ सिरप दिखाते हुए कहा कि यह बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार है। यह बच्चों की है और इसे पीडियाटिक दवा बोलते हैं। इन दवाओं को पीके बच्चों की मौत हुई थी। उस दवा और फेंसिल यह कोल्ड ड्रिफ दोनों डिफरेंट दवाएं हैं। इन दवाओं से मतलब फेंसिल से किसी बच्चों की मौत नहीं होती क्योंकि वो बच्चों के लिए सिरप नहीं है। वो एडल्ट्स के लिए है और बच्चों की सिरप अलग आती है जो कि यह है जिससे बच्चे पी के मरे थे।
किसी राजनेता या राजनीतिक दल से संबंध नहीं
जौनपुर के बाहुबली पूर्व विधायक के साथ शुभम की फोटो पर उठ रहे सवाल पर कहा कि मेरा किसी राजनीतिक दल या किसी राजनेता से किसी तरह का व्यापारिक संबंध नहीं रहा है। शुभम ने साफ-साफ कहा कि मुझे फंसाया जा रहा है और यह फंसाने का काम नारकोटिक्स विभाग के लोग कर रहे हैं। ड्रग डिपार्टमेंट के अधिकारी उससे पैसा मांग रहे थे और उसको अब फंसाया जा रहा है। शुभम का दावा है कि अगर कंपनी ने ही यह कप सिरप बनाया है जिसकी सप्लाई मैं कर रहा था तो कंपनी पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? सिर्फ मुझे ही क्यों फंसाया जा रहा है? शुभम ने सवाल किया कि उत्तराखंड की फर्मों की जांच नहीं चल रही। जांच सिर्फ हमारी चल रही है।
माना, सौ करोड़ का माल बेचा
शुभम ने यह माना है कि 100 करोड़ का माल बेच चुका है। कहा कि कंपनी माल बना रही है तो हम लेंगे। अगर हमको दोषी बनाया जा रहा है तो कंपनी दोषी क्यों नहीं है? जिस तरीके से कंपनी ने हमको माल दिया, उस तरीके से हमने आगे पार्टियों को बेचा है। हम उनसे पेमेंट लेने के हकदार है ना कि वो माल का क्या कर रहे हैं, उसका डिटेल हम नहीं मांग सकते हैं।
वीडियो के आखिर में शुभम ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की कि मेरी बातों की भी जांच कराएं। कहा कि उसे पुलिस से डर लगता है इसलिए फरार है। मैं किसी तरीके का कोई अवैध काम नहीं कर रहा था।

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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