युवा मोर्चा अध्यक्ष से डिप्टी CM तक, दिनेश शर्मा को क्यों मिली उपराज्यपाल की जिम्मेदारी?
यूपी के पूर्व डिप्टी सीएम डॉक्टर दिनेश शर्मा को बड़ी जिम्मेदारी मिली है। उन्हें अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। नेतृत्व ने जो निर्णय लिया है, उसका पूरी निष्ठा से पालन किया जाएगा।

UP News: भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सदस्य डॉक्टर दिनेश शर्मा को शनिवार देर रात अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी सरकारी नोटिफिकिकेशन में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने डॉ. दिनेश शर्मा को उपराज्यपाल नियुक्त किया है। यह नियुक्ति उनके पदभार संभालने की तारीख से प्रभावी होगी। बता दें कि इससे पहले वह उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। उनका राज्यसभा का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होने वाला था। साथ ही वह राज्यसभा के उपसभापति भी हैं।
दिनेश शर्मा को अंडमान-निकोबार का उपराज्यपाल बनाए जाने के फैसले ने सियासी गलियारों में चर्चा बढ़ा दी है। भाजपा संगठन में लंबे अनुभव से लेकर लखनऊ के मेयर, यूपी के उप मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद तक का सफर तय कर चुके डॉ. शर्मा की पार्टी नेतृत्व के साथ बेहतर तालमेल वाली छवि रही है। नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ के साथ उनके लंबे राजनीतिक संबंध भी अहम माने जाते हैं। नई जिम्मेदारी मिलने पर दिनेश शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। नेतृत्व ने जो निर्णय लिया है, उसका पूरी निष्ठा से पालन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अंडमान निकोबार देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। पर्यटन की दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है और यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटकों का आवागमन होता है। ऐसे में वहां काम करते समय विशेष सजगता और संवेदनशीलता बरतनी होगी। केंद्र सरकार के निर्णयों को पूरी तरह लागू कराने के साथ ही सरकार से बेहतर सामंजस्य बनाकर काम किया जाएगा। उनका प्रयास होगा कि वहां की व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ किया जाए और स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी नीतियां तैयार कर उन्हें जमीन पर लागू कराया जाए। पूर्व डिप्टी सीएम ने आगे कहा कि अंडमान निकोबार में पर्यटन, बुनियादी सुविधाओं और जनसुविधाओं के क्षेत्र में बेहतर काम की काफी संभावनाएं हैं। नई जिम्मेदारी को वह पूरी गंभीरता से निभाएंगे। उन्होंने कहा कि वहां की जनता के हित में काम करना उनकी प्राथमिकता होगी।
पार्टी का हर फैसला सर्वोपरि
डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और पार्टी नेतृत्व ने जो जिम्मेदारी सौंपी है उसे पूरी मेहनत और ईमानदारी के साथ पूरा किया जाएगा, यही उनका स्वभाव भी है। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व जो भी फैसला करता है वह बहुत सोच समझकर लेता है। पार्टी का हर फैसला सर्वोपरि है। कार्यभार ग्रहण करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि समय और परिस्थितियों को देखते हुए जल्द ही अंडमान निकोबार पहुंचकर कार्यभार ग्रहण किया जाएगा।
योगी के पहले कार्यकाल में रहे उप मुख्यमंत्री
दिनेश शर्मा वर्ष 1992 से 1998 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। जब वह युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष थे तब ही वह नरेंद्र मोदी के संपर्क में आए थे। इसके बाद से ही दोनों नेताओं का आपसी तालमेल बना रहा। जब 2017 में यूपी में योगी सरकार बनी तो उन्हें उप मुख्यमंत्री बनाया गया था। पांच साल उप मुख्यमंत्री रहने के दौरान उनके संबंध मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी काफी मधुर रहे। उप मुख्यमंत्री के बाद वह 2023 में राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित हुए। वहीं डिप्टी सीएम बनने के पहले 2006 से 2017 तक वह लखनऊ के मेयर थे। इसके अलावा राष्ट्रीय युवा आयोग के अध्यक्ष, यूपी पर्यटन निगम के उपाध्यक्ष समेत अन्य पदों पर भी रह चुके हैं।
महाराष्ट्र में भाजपा के चुनाव प्रभारी थे दिनेश शर्मा
दिनेश शर्मा को वर्ष 2014 में भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। इसी साल वह भाजपा के सदस्यता अभियान के राष्ट्रीय संयोजक बनाए गए। 2022 तक उप मुख्यमंत्री रहने के बाद वह 2023 में राज्यसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। 2024 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में भाजपा के चुनाव प्रभारी बनाए गए।
गुजरात के प्रभारी भी रहे
साल 2014 में दिनेश शर्मा को गुजरात का प्रभारी भी बनाया गया था। उस वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। एक बार फिर भी पुराना संबंध यहीं से प्रगाढ़ हुआ। जानकारों के मुताबिक दिनेश शर्मा पर नरेंद्र मोदी का भरोसा ही वह वजह थी कि उन्हें यूपी का उप मुख्यमंत्री चुना गया था।
पिता का भी आरएसएस से रहा पुराना संबंध
डॉ. दिनेश शर्मा का जन्म 12 जनवरी, 1964 को लखनऊ में हुआ था। उनका ताल्लुक लखनऊ के ब्राह्मण परिवार से है। इनके पिता केदार नाथ शर्मा (पाधाजी) आरएसएस और जनसंघ के कार्यकर्ता थे। डॉ. शर्मा को आरएसएस से जुड़ाव की थाती विरासत में मिली है। लखनऊ विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के बाद डॉ. शर्मा यहीं प्रोफेसर हुए। प्रोफेसर कार्यकाल के दौरान उन्होंने 20 से अधिक छात्रों को पीएचडी कराई और 6 किताबें लिखीं।


