मूर्ख थी जो सोचा था कि...यूपी की लोकप्रिय IAS दिव्या मित्तल ने क्यों दिया इस्तीफा? पोस्ट में साझा की बात
यूपी की लोकप्रिय आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस इस्तीफे ने ब्यूरोक्रेसी से लेकर आम लोगों तक को हैरान कर दिया है।इस्तीफे के बाद दिव्या मित्तल ने अपने एक्स अकाउंट पर विस्तार से एक पोस्ट डाली है। इस पोस्ट में उन्होंने अपने मन के कई भावों को व्यक्त किया है।

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में डीएम के रूप में अपनी संवदेनशील कार्यशैली से लोगों का दिल जीतने वाली और हाल ही में देवरिया जिलाधिकारी के पद से राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर ट्रांसफर की गईं लोकप्रिय अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यूं अचानक उनके इस्तीफे से लोग हैरान हैं। वे इसकी वजह जानना चाहते हैं। हालांकि इस्तीफे के बाद दिव्या मितल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट लिखी है लेकिन इसमें उन्होंने इस्तीफे की वजह का जिक्र नहीं किया है। यूपी की लोकप्रिय आईएएस दिव्या मित्तल ने जो कुछ लिखा है लोग उसे बार-बार पढ़कर इस्तीफे के पीछे उनकी सोच को समझने की कोशिश कर रहे हैं। दिव्या मित्तल ने अपनी पोस्ट में मिट्टी के कर्ज का जिक्र किया है और यह भी लिखा है कि वह कर्ज लगातार बढ़ता ही जा रहा था। उन्होंने लिखा है-मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूं। सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया। अपनी पोस्ट की आखिरी पांच लाइनों में दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर जिले के लहुरिया दह की पहाड़ी की एक वृद्ध मां को याद किया है। दिव्या मित्तल ने लिखा है कि वो अपने गांव में पहली बार पानी पहुंचता देख कुछ नहीं बोलीं बस कांपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गईं।
दिव्या मित्तल की तैनाती उत्तर प्रदेश के जिस किसी जिले में हुई उन्होंने वहां अपनी एक खास पहचान बना ली। 2023 में मिर्जापुर जिले से बस्ती ट्रांसफर के वक्त विदाई देने उमड़े लोगों ने दिव्या मित्तल को गुलाब के फूलों की पंखुड़ियों से नहला दिया था। डीएम की इस विदाई का वीडियो सोशल मीडिया में खूब वायरल हुआ था। दिव्या मित्तल बस्ती और देवरिया में भी अपने काम करने के तरीके और जनता से जुड़ने के कारण काफी लोकप्रिय रहीं। पिछले दिनों राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर उनकी तैनाती के बाद बस कुछ ठीक ही चल रहा था। फिर अचानक से उन्होंने इस्तीफा क्यों दे दिया यह बात लोगों को समझ नहीं आ रही।
‘एक्स’ पर लिखा- 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से दिया विराम
आईएएस दिव्या मित्तल ने अपने इस्तीफे के बाद ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा-‘आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है। साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर 'सब कुछ' पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।
देवरिया ने सिखाया-सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं-कर्तव्य है
दिव्या मित्तल ने आगे लिखा है कि बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि 'असंभव' कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है।
मूर्ख थी जो सोचा था....
आईएएस दिव्या मित्तल ने आगे लिखा-‘मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूँ। सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया। लोग मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा ख़ुश हुए। उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी। और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी। इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी। और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे।’
नौकरी छोड़ते वक्त वो वृद्ध मां आईं याद
आईएएस दिव्या मित्तल को नौकरी छोड़ते वक्त एक वृद्ध मां याद आईं। उन्होंने अपनी पोस्ट की आखिरी लाइनों में लिखा-‘आज आभार से आँखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध माँ, जो अपने गाँव में पहली बार पानी पहुँचता देख कुछ नहीं बोली, बस काँपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा। और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।’


