लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बसपा को क्यों उठाना पड़ रहा नुकसान? मायावती ने खुलकर बताया

लखनऊ, वार्ता
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पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बसपा को हुए नुकसान पर बसपा प्रमुख मायावती ने विस्तार से चर्चा की। चुनाव में मिली हार को लेकर मायावती ने कई कारण भी गिनाए।

bsp chief mayawati
बसपा प्रमुख मायावती

Maywati News: बसपा अध्यक्ष मायावती ने ब्राह्मण समाज समेत सर्वसमाज से बसपा से जुड़े रहने की अपील करते हुए कहा है कि पार्टी की नीति 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' की है और वह किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि सर्वसमाज के हित एवं कल्याण के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा कि पार्टी में नेताओं के बजाय तन, मन और धन से समर्पित अंबेडकरवादी कार्यकर्ताओं की फौज हर स्तर पर अधिक सक्रिय है। यह परंपरा पार्टी और आंदोलन के हित में कांशीराम ने स्थापित की थी। पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बसपा को रहे नुकसान को लेकर भी मायावती ने विस्तार से बताया।

मायावती ने 'एक्स' पर जारी बयान में कहा कि ब्राह्मण समाज और अन्य समाजों के जो लोग अब तक बसपा से निकाले गए हैं अथवा निकाले जा रहे हैं, या अपने निजी स्वार्थ में दूसरी पार्टियों में चले गए हैं, अथवा अपने गलत कार्यों से बचने के लिए सत्ताधारी पार्टी में शामिल हुए हैं, उनके प्रति लोगों की धारणा उनके कार्यों के आकलन के आधार पर संदेहपूर्ण और निराशाजनक बन रही है। उन्होंने कहा कि खासकर भाजपा सरकार के दौरान भी ऐसे लोग निजी व पारिवारिक स्वार्थ के लिए अपनी पार्टी से अधिक उठाते रहे, जबकि अपने समाज के लिए वे लोग अधिकतर निष्क्रिय और उदासीन ही बने रहे। इन कारणों से ऐसे लोगों ने अपने समाज को भी सही तरीके से बसपा से नहीं जोड़ा, जिसके चलते पिछले कई लोकसभा और विधानसभा आम चुनावों में पार्टी को काफी नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है।

नया संगठन और ईमानदार लोगों को तैयार कर रही बसपा

बसपा प्रमुख ने कहा कि इसके बाद लंबे अरसे से पार्टी के प्रति ईमानदारी और निष्ठा के साथ समर्पित वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन में नए संगठन और ईमानदार लोगों, खासकर युवाओं को पार्टी की नर्सरी में तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह अभियान पूरी तरह जारी है और पार्टी को उम्मीद है कि ये नए और पुराने कार्यकर्ता हर मामले में बेहतर, साफ-सुथरी और मिशनरी मानसिकता के साथ उभरेंगे तथा सच्चे अंबेडकरवादी एवं संविधानवादी संघर्ष के मजबूत स्तंभ बनकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी खासकर ब्राह्मण समाज को यह विश्वास दिलाना चाहती है कि वह पूरी मजबूती के साथ बसपा से जुड़ा रहे। हर चुनाव में उसकी तैयारी के आधार पर उसकी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी और चुनावी उम्मीदवार बनाने के साथ ही सरकार बनने पर वर्ष 2007 की तरह ब्राह्मण समाज तथा अन्य सभी समाजों को पूरा उचित मान-सम्मान दिया जाएगा।

बसपा ने सपा पर निशाना साधा

मायावती ने कहा कि सर्वसमाज आधारित बसपा को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के मामले में अब विशेषकर दलित समाज को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। उन्होंने कहा कि बसपा की नर्सरी सर्वसमाज के हसीन गुलदस्ते की तरह है और वह अधिकांशतः हरी-भरी एवं सजी रहती है। उन्होंने इससे पहले भी ब्राह्मण समाज के बसपा से जुड़ने का दावा करते हुए समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि ब्राह्मण समाज के बसपा से जुड़ने और पार्टी द्वारा इस वर्ग के लोगों को उम्मीदवार बनाए जाने से सपा विचलित है।

Dinesh Rathour

लेखक के बारे में

Dinesh Rathour

दिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका (डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।

पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी है।

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