कौन है टिन्नू यादव? राम मंदिर केस में मोहरा या माफिया, चंपत के दम पर कैंपस में राज करता था
राम मंदिर चढ़ावा चोरी में गिरफ्तार आठ आरोपियों में टिन्नू यादव भी शामिल हैं। टिन्नू यादव का राम मंदिर परिसर में अलग ही रुतबा था। संघ और विहिप पदाधिकारियों का करीबी माना जाने वाला टिन्नू यादव मंदिर परिसर में राज करता था।

Ayodhya News: राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के प्रकरण में एफआईआर में नामजद आरोपी रामशंकर यादव टिन्नू संघ और विहिप के बड़े अधिकारियों का हमेशा से ही चहेता रहा है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी में टिन्नू का बड़ा हाथ माना जा रहा है। टिन्नू यादव का राम मंदिर परिसर में रूतबा था। चंपत की दम पर टिन्नू यादव मंदिर परिसर में राज करता था। राम मंदिर में ट्रस्ट महासचिव चंपतराय के सिपहसालार के रूप में प्रमुख भूमिका निभाने के कारण बहुतेरों के लिए ईर्ष्या का कारण भी बना। यहीं से टिन्नू यादव को पद-प्रतिष्ठा और पैसे की अहमियत ठीक से पता चली तो उसे रास्ते से भटकने में भी देर नहीं लगी। हालांकि बड़े अधिकारियों का उस पर भरोसा इतना मजबूत था कि छोटी-छोटी बातों पर उन्होंने कभी गौर ही नहीं किया। यदि गौर किया होता तो शायद यह दिन नहीं देखना पड़ता। सूत्रों के मुताबिक आरोपियों के पास से जो रिकवरी हुई है, उसमें सबसे ज्यादा पैसे टिन्नू के पास से ही बरामद किए गए हैं।
टिन्नू को लेकर ट्रस्ट महासचिव ही धोखे का शिकार नहीं हुए बल्कि टिन्नू के करीबी मोहल्लेवासियों को भी सहसा विश्वास नहीं हो रहा है। बताते हैं कि वह एक परिश्रमी और मिलनसार व्यक्ति है। उच्च शिक्षित न होते हुए भी वह सामाजिक विज्ञान को बेहतर ढंग से समझता था। राम मंदिर में चढ़ावे के चोरी की घटना से पहले कभी किसी को टिन्नू यादव पर शक करने की गुंजाइश भी नहीं थी। चर्चा यह थी कारसेवक पुरम के दिवंगत प्रभारी व संघ प्रचारक प्रकाश अवस्थी की भी टिन्नू ने बड़ी सेवा की थी। इससे प्रभावित होकर उन्होंने बीमा में टिन्नू को नामिनी बना दिया था। उनकी मृत्यु के बाद बीमित धनराशि टिन्नू को ही मिली जो कि लाखों में थी।
1988 में टिन्नू ने आरएसएस में लिया था प्रशिक्षण
स्वर्गद्वार अयोध्या के मूल निवासी टिन्नू के नाते-रिश्तेदारों को मिला कर बड़ा परिवार है जबकि टिन्नू यादव स्वयं चार भाई है जिनमें इनका भाई दिवंगत हो गया और शेष दो हैं। एक भाई की नया घाट पर जलपान गृह तो दूसरा छोटा भाई नगर निगम में कार्यरत हैं। टिन्नू ने इसी साल अपने लड़के का विवाह भी किया है। बताया गया कि टिन्नू 1988 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्राथमिक शिक्षा वर्ग में प्रशिक्षण लेकर स्वयंसेवक बना था और तभी से कारसेवक पुरम में सेवारत था। वहीं विहिप के कोषाध्यक्ष दिवंगत रामबाबू गुप्ता के साथ मिलकर अवध विश्वविद्यालय के निकट दुर्गा पुरी कालोनी में चार बिस्वा जमीन खरीदी थी जिस पर 2015-16 में डेढ़ दर्जन कमरे का हास्टल बनवाया था। इस हास्टल को 2020-21 में एलएंडटी ने अपने कर्मचारियों के लिए 55 हजार रुपए प्रतिमाह की दर से किराए पर लिया था।
आरोपियों से 80 लाख बरामद, जेल भेजे गए
श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस ने शुक्रवार सुबह आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें सोमवार तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। मोहर्रम के अवकाश के चलते सभी आरोपियों को रिमांड मजिस्ट्रेट निवेदिता सिंह की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने सुनवाई के बाद सभी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आदेश दिया। वहीं, जांच के दौरान ट्रस्ट की ओर से आरोपियों के कब्जे से 79.85 लाख रुपये नकद, सोने की चेन, चांदी के सिक्के, चांदी के पत्ते आदि कीमती आभूषण-वस्तुएं बरामद किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस ने ट्रस्ट द्वारा बरामद नकदी, सोना-चांदी और अन्य सामान को अपने कब्जे में लेकर मामले का अहम साक्ष्य बनाते हुए न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है।
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Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
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उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


