लखनऊ अग्निकांड में 15 मौतों का जिम्मेदार कौन? SIT की जांच में घिरे 30 अफसर, बड़े ऐक्शन की तैयारी
लखनऊ अग्निकांड में गठित एसआईटी की जांच में 30 अफसरों के नाम सामने आए हैं। जांच में पाया गया है कि इन अफसरों ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई। इसी के चलते 15 लोगों की मौत हो गई। अब इन पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी है।

Lucknow Fir Tregedy: पांच दिन पहले लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में 15 मौतों के जिम्मेदारों का तक एसआईटी पहुंच गई है। एसआईटी की जद में 30 बड़े अफसर आए हैं। जांच में पाया गया है कि संबंधित अफसरों ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन ठीक से नहीं किया। नतीजतन, इतना बड़ा हादसा हो गया। एसआईटी ने संबंधित विभागों से भी सफाई मांगी है, लेकिन सीधे तौर पर जिम्मेदार इन अफसरों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
एसआईटी ने अग्निकांड की भौतिक जांच लगभग पूरी कर ली है। सभी पक्षों के बयान हो चुके हैं। घटनास्थल की तस्वीरें, तकनीकी पहलू तथा सुरक्षा इंतजाम की दो बार जांच हो चुकी है। अब तकनीकी जांच शुरू हुई है। इसमें इस बात का सिलसिलेवार उल्लेख होगा कि कहां लापरवाही, कहां चूक और कहां नियमों को नजरंदाज किया गया। अब तक की जांच में साफ हुआ कि निगरानी करने वाले विभागों ने ठीक से काम नहीं किया। नक्शे के विपरीत निर्माण पाया गया। सेटबैक एरिया की व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई गईं। बिल्डिंग में केवल आगे से ही जाया और निकला जा सकता था। आग जैसी स्थिति बनने पर बुझाने के कोई इंतजाम नहीं थे। एसआईटी ने हर बिंदु पर नजर दौड़ाई है और इसके लिए जिम्मेदारी भी तय कर रही है।
पांच पीसीएस अफसरों पर कार्रवाई की सिफारिश कर चुका है एलडीए
एलडीए उपाध्यक्ष ने अपनी आंतरिक जांच के बाद पहले ही पांच पीसीएस अफसरों और 19 इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश कर दी है। इन सभी पर आरोप है कि जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया और बिल्डिंग निर्माण में नियमों की धज्जियां उड़ाई गई। बिल्डिंग बनने और उसके बाद भी कोई प्रवर्तन कार्रवाई नहीं की। अवैध निर्माण घोषित होने के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई। इस रिपोर्ट को भी एसआईटी ने जांच का हिस्सा बनाया है। इसी तरह विद्युत सुरक्षा का कभी आडिट ही नहीं कराया गया। इसमें दलील दी जा रही है कि भवन स्वामी ने आडिट कराने के लिए कभी पालन नहीं किया। उल्टे फर्जी एनओसी दाखिल कर दी। जब बिल्डिंग का निर्माण हुआ तो मैनुअल आवेदन आते थे और कागज पर एनओसी जारी होती थी। अब व्यवस्था आनलाइन हो चुकी है।
फायर सेफ्टी अफसर को किया जा चुका है सस्पेंड
विद्युत सुरक्षा विभाग एनओसी को फर्जी घोषित कर चुका है। एसआईटी जांच में साफ हो चुका है कि इलेक्ट्रिक सेफ्टी के कोई इंतजाम नहीं थे। कभी इलेक्ट्रिक ऑडिट भी नहीं कराया गया। इसके लिए भी विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। आग से बचाव के इंतजामों की जांच न होने के कारण पहले ही इलाके के फायर सेफ्टी अफसर को निलंबित किया जा चुका है। इसमें पहले तैनात रहे अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय की जा सकती है। विभाग की ओर से एसआईटी को विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की गई है। इसमें यह भी बताया गया है कि कौन कब-कब तैनात रहा। किसने फायर एनओसी दी। सुरक्षा मानक पूरे नहीं थे तो एनओसी क्यों दी गई। ऐसे ही तमाम सवाल किए गए हैं। एसआईटी अब इसी आधार पर रिपोर्ट तैयार कर रही है और सबकी जिम्मेदारी तय होगी। एसआईटी की रिपोर्ट दाखिल होने के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई का फैसला हो सकता है।


