दोस्ती से डबल मर्डर तक, कौन हैं कमलेश पाठक? पढ़ें चर्चित मंजुल-सुधा हत्याकांड की इनसाइड स्टोरी
वकील मंजुल चौबे और उनकी बहन का हत्याकांड औरैया के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में रहा। इस मामले में बुधवार को फैसला आया। अदालत ने पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक, उनके भाई पूर्व ब्लॉक प्रमुख संतोष पाठक समेत 10 आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।

उत्तर प्रदेश में बुधवार को आए एक फैसले ने सियासी गलियारों तक हलचल मचा दी। औरैया के वकील मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा चौबे की हत्या के इल्जाम में विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने समाजवादी पार्टी के पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक, उनके भाई पूर्व ब्लॉक प्रमुख संतोष पाठक समेत 10 आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। मंजुल-सुधा हत्याकांड के छह साल बाद अदालत का यह फैसला आया है। बुधवार को इस फैसले को लेकर औरैया कचहरी परिसर के साथ ही पूरे जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। मामले में एक आरोपित के नाबालिग होने के चलते उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board - JJB) में विचाराधीन है।
पहले दोस्ती-फिर दुश्मनी
वकील मंजुल चौबे और उनकी बहन का हत्याकांड शुरू से ही औरैया के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में रहा। बताते हैं कि पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक और वकील मंजुल चौबे पहले दोस्त हुआ करते थे। दोनों के बीच सब कुछ ठीक चल रहा था कि तभी मंदिर की एक बीघा जमीन को लेकर उनमें दूरियां पैदा हो गईं। आरोप है कि कमलेश पाठक उस जमीन पर कब्जा करना चाहते थे। जबकि मंजुल चौबे इसका विरोध कर रहे थे। इसी विवाद के बाद दोनों दोस्तों के बीच दुश्मनी हो गई थी।
जमीन के लिए हुआ था डबल मर्डर
मंजुल चौबे और कमलेश पाठक के बीच झगड़े की जड़ में औरैया के पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास की एक बीघा जमीन रही। पूरा विवाद इसी जमीन को लेकर हुआ। इसी जमीन के लिए मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा चौबे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। विवाद, पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक, वकील मंजुल चौबे और उनकी बहन सरकारी शिक्षिका सुधा चौबे के बीच में था। दोनों ही पक्ष जमीन पर अपना-अपना दावा कर रहे थे। 15 जनवरी 2020 को दोनों पक्ष इसी मामले को लेकर आमने-सामने आ गए। बताया जाता है कि विवाद के बीच कमलेश पाठक की ओर से फायरिंग शुरू हो गई।
यूं बढ़ता गया झगड़ा
कमलेश पाठक और अधिवक्ता मंजुल चौबे के बीच कभी बेहद करीबी संबंध बताए जाते थे। मंजुल चौबे के छात्रसंघ अध्यक्ष चुने जाने के समय कमलेश पाठक उनके प्रमुख सहयोगियों में थे। साल 2006 के नगर पालिका चुनाव के दौरान दोनों के संबंधों में दरार की बात सामने आई। इसके बाद उनके बीच राजनीतिक और व्यक्तिगत दूरियां बढ़ती चली गईं। वक्त के साथ यह संबंध राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई में बदल गया। दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ता गया।
900 तारीखें और 72 गवाह पेश हुए
करीब 6 साल 5 माह तक चली औरैया डबल मर्डर केस की सुनवाई में 900 से अधिक तारीखें पड़ीं। इस दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से कुल 72 गवाह न्यायालय के सामने पेश हुए। इनमें अभियोजन पक्ष के 33 और बचाव पक्ष के 39 गवाह शामिल हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर करीब डेढ़ साल से मामले की सुनवाई विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट औरैया में प्रत्येक कार्यदिवस पर चल रही थी।
इन आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल
पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। आरोपियों में कमलेश पाठक, संतोष पाठक, रामू पाठक, कुलदीप अवस्थी, विकल्प अवस्थी, राजेश शुक्ल, शिवम अवस्थी, आशीष दुबे, रविंद्र चौबे उर्फ लल्ला, गनर अवनीश प्रताप सिंह और लवकुश सविता शामिल हैं। एक आरोपी के नाबालिग होने के कारण उसकी सुनवाई किशोर न्यायालय में हुई।


