कौन हैं बसपा विधायक उमाशंकर, जिनके घर पड़ी आईटी की रेड, MLA से ज्यादा पत्नी के पास है संपत्ति

Feb 25, 2026 05:03 pm ISTDinesh Rathour लाइव हिन्दुस्तान, लखनऊ
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उमाशंकर बलिया की रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से बसपा के इकलौते विधायक हैं। उमाशंकर ने पहली बार 2012 के विधानसभा चुनाव में दांव आजमाया था और जीत भी दर्ज की थी। 2017 में एक शिकायत के चलते उनकी विधायकी चली गई थी। 

कौन हैं बसपा विधायक उमाशंकर, जिनके घर पड़ी आईटी की रेड, MLA से ज्यादा पत्नी के पास है संपत्ति

बहुजन समाज पार्टी के विधायक उमाशंकर सिंह के गोमतीनगर स्थित आवास और कार्यालय पर बुधवार को आयकर विभाग ने छापेमारी की कार्रवाई की। उमाशंकर बलिया की रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से बसपा के इकलौते विधायक हैं। वह करोड़ों के मालिक हैं, जबकि चल संपत्ति में उनकी पत्नी उनसे भी ज्यादा अमीर बताई गई हैं। 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग को दिए गए शपथ पत्र में उमाशंकर ने बताया था कि 2012 में उनकी संपत्ति 20 करोड़ 75 लाख 63 हजार 588 रुपये थी। पांच साल में उमाशंकर की संपत्ति की तेजी से बढ़ी थी। 2017 में उमाशंकर ने कुल संपत्ति 40 करोड़ 19 लाख 86 हजार 172 रुपये बताई थी। इनकम टैक्स के अनुसार 2020-21 में उमाशंकर ने कुल संपत्ति 36 लाख 69000 बताई थी। इसके अलावा विधायक उमाशंकर के पास 8,27,10414.16 की चल संपत्ति है। उनके पास एक पिस्टल, एक राइफल और एक रिपीटर गन भी है। उमशंकर और उनकी पत्नी के नाम कृषि भूमि, गैर-कृषि भूमि और वाणिज्यिक और आवासीय भवन भी है।

कितने की मालकिन हैं उमाशंकर की पत्नी

इनकम टैक्स के अनुसार 2020-21 में उमाशंकर ने अपनी पत्नी पुष्पा सिंह की आय 74 लाख 08, 160 बताई गई थी। 2016-17 की बात करें तो उनकी आय एक करोड़, 50 लाख 30 हजार 592 रुपये बताई गई। 2017-18 में 57 लाख 64 हजार 579 रुपये, 2019-20 में उनकी आय एक करोड़ 50 लाख 28 हजार 420 रुपये और 2018-19 में तीन करोड़ 11 लाख एक हजार 482 रुपये हो हो गई थी। इसके अलावा उनकी पत्नी के पास 9,78,49,879.38 की चल संपत्ति भी है। शपथ पत्र में उमाशंकर ने अपनी पत्नी के पास 62 लाख 92 हजार 470 रुपये के सोने का भी जिक्र किया था।

तीन बार लड़ चुके हैं विधायकी का चुनाव

बसपा के विधायक उमाशंकर तीन बार चुनाव लड़ चुके हैं। उमाशंकर ने पहली बार बसपा की टिकट पर 2012 में चुनाव लड़ा था। इसके बाद 2017 के विधानसभा में भी भाग्य आजमाया। भाजपा लहर के बाद भी उमाशंकर ने जीत दर्ज की। एडवोकेट सुभाष चंद्र सिंह ने 18 दिसंबर 2013 को शपथ पत्र देकर उमाशंकर के खिलाफ लोकायुक्त संगठन में शिकायत की थी। आरोप लगाया था कि उमाशंकर विधायक होने के बाद लोक निर्माण विभाग से सरकारी ठेके लेकर सड़क निर्माण का कार्यकर रहे हैं।

मामले की जांच तत्कालीन लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने की। जांच में उमा शंकर दोषी पाए गए थे। 2015 में उमाशंकर की विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। उमाशंकर ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे थे। 2016 में हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को प्रकरण में खुद जांच कर राज्यपाल को अवगत कराने का आदेश दिया। 14 जनवरी 2017 को उनकी विधायकी खत्म कर दी गई।

50 से ज्यादा अफसरों ने मारा छापा

बसपा विधायक उमाशंकर के घर सुबह-सुबह गाड़ियों की लाइन देखकर हड़कंप मच गया। 50 से ज्यादा अफसर कई गाड़ियों से पहुंचे तो बलिया से लेकर लखनऊ तक की राजनीति में हलचल पैदा हो गई। उमाशंकर सिंह के बलिया जनपद के खनवर स्थित आवास पर बुधवार सुबह आयकर विभाग की टीम ने छापा मारा। टीम ने घर में मौजूद सभी लोगों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में लेकर पूछताछ की प्रक्रिया शुरू कर दी। टीम ने विधायक के आवास में फाइलें, इलेक्ट्रानिक्स डिवाइस और रिकॉर्ड खंगाला। इसके अलावा टीम ने लेन-देन और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों को भी देखा। खबर लिखे जानें तक कार्रवाई जारी थी। छापेमारी के दौरान विधायक के भाई रमेश सिंह आवास पर मौजूद थे। बताया जा रहा है कि रमेश सिंह छात्रशक्ति इंफ्रा कंस्ट्रक्शन कंपनी के डायरेक्टर हैं। आयकर टीम ने गांव के पास स्थित कंपनी के प्लांट पर भी पहुंचकर ताला लगा दिया और वहां दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

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दिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका (डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।

पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी है।

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