
Delhi Blast: कौन हैं डा.शाहीन के वे 4 मददगार ? लखनऊ में ठहरे थे; होटल के पास न नाम-न फुटेज
जिस होटल में इनके रुके होने की जानकारी दी गई थी वहां दो महीने पहले का फुटेज भी उपलब्ध नहीं है। शाहीन और परवेज ने उनका हुलिया ही जम्मू-कश्मीर पुलिस को बताया है। फोटो न होने की वजह से दिक्कत आ रही है। कोशिश की जा रही है कि परवेज और डा. शाहीन के काल डिटेल से इन लोगों का नंबर मिल जाए
Delhi Blast Case: डा. शाहीन के चार मददगार दो महीने पहले लखनऊ में चारबाग रेलवे स्टेशन के पास एक होटल में ठहरे थे। शाहीन इस होटल में इन लोगों से मिलने नहीं गई थी, लेकिन दूसरे दिन वह अपने भाई डा. परवेज और इन मददगारों के साथ कानपुर गई थी। जम्मू-पुलिस कश्मीर पुलिस की इस सूचना पर एटीएस ने इस होटल के साथ ही नाका क्षेत्र के कुछ अन्य होटलों में भी पूछताछ की है।
हालांकि किसी होटल से अभी इन मददगारों का ब्योरा नहीं मिला है। एटीएस सूत्रों के मुताबिक मददगारों के नाम पूरी सही से तरह सामने नहीं आए है, जो नाम बताया जा रहे हैं उसमें किसी का नाम रजिस्टर पर नहीं मिला है। साथ ही जिस होटल में रुके होने की पुख्ता जानकारी दी गई थी वहां दो महीने पहले का फुटेज भी उपलब्ध नहीं है। शाहीन और परवेज ने उनका हुलिया ही जम्मू-कश्मीर पुलिस को बताया है। फोटो न होने की वजह से दिक्कत आ रही है। कोशिश की जा रही है कि परवेज और डा. शाहीन के काल डिटेल से इन लोगों का नंबर मिल जाए अथवा किसी तरह से फोटो हासिल हो जाए।
परवेज और शाहीन के बयानों में विरोधाभास
एटीएस सूत्रों के मुताबिक डा. परवेज और शाहीन के बयानो में विरोधाभास भी मिला है। जम्म-कश्मीर पुलिस ने दोनों से अलग-अलग पूछताछ की तो उनके बयानों में अंतर मिला, फिर जब सामने बैठाया गया तो कई सवालों के जवाब में दोनों लोग जांच एजेन्सियों को उलझाते रहे। हालांकि इनसे कई अहम जानकारियां मिल रही हैं। जिसे यूपी की खुफिया एजेन्सियों और एटीएस को साझा किया जा रहा है। डा. शाहीन और डा. परवेज की लखनऊ के अलावा अन्य जिलों में सक्रियता का भी पता लगाया जा रहा है।
आतंकियों के संपर्क देखे जा रहे
एटीएस के हत्थे चढ़े बिलाल और गुजरात एटीएस के हाथ लगे सुहेल ओर आजाद नबी से भी डा. परवेज और डा. शाहीन के सम्पकों के बारे में भी पता किया जा रहा है। कहीं ये सब भी एक ही आका से तो नहीं जुड़े हुए हैं। यह साफ हो चुका है कि पिछले कुछ दिनों में पकड़े गए इन सभी लोगों का मकसद भारत में वैमनस्यता फैलाना ही था। सब बड़ी साजिश में लगे हुए थे।





