मैं रहूं न रहूं, मेरी चिंता छोड़िए; खराब तबीयत के बीच प्रेमानंद महाराज की भक्तों से वीडियो अपील

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प्रेमानंद महाराज ने खराब स्वास्थ्य के बीच भक्तों से भावुक अपील कर चिंता न करने को कहा। किडनी बीमारी के कारण उनकी पदयात्रा और दर्शन 17 मई से बंद हैं। वीडियो संदेश में उन्होंने भक्तों से भजन, नाम जप और सेवा में जुड़े रहने की बात कही।

Premanand Ji Maharaj teachings

प्रेमानंद महाराज ने खराब स्वास्थ्य के बीच अपने भक्तों और शिष्यों के लिए भावुक संदेश जारी किया है। वृंदावन स्थित केली कुंज आश्रम ट्रस्ट के यूट्यूब चैनल पर रविवार को 1 मिनट 19 सेकेंड का वीडियो अपलोड किया गया, जिसमें महाराज ने भक्तों से चिंता न करने की अपील की। उन्होंने कहा, “हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं। बिना बोले भी तुम्हारे दिमाग में हम होंगे। आप निश्चिंत होकर भजन और नाम जप करते रहिए। प्रेमानंद महाराज ने अपने अनुयायियों से कहा कि जो जहां जिस सेवा में है, वह उसी सेवा में समर्पित भाव से बना रहे।

प्रेमानंद जी महाराज की भक्तों से अपील

उन्होंने भरोसा दिलाया कि गुरुदेव हमेशा भक्तों के साथ हैं और समय आने पर वह स्वयं संवाद करेंगे। उन्होने अपने भक्तों से अपील करते हुए कहा कि 'बिल्कुल चिंता मत करो। हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं। अंतिम बात यही कि चिंता नहीं करनी। न ये चिंता करनी है कि कैसे हमारा उत्थान होगा। बिना बोले तुम्हारे दिमाग में हम होंगे। उनके इस संदेश के बाद भक्त भावुक हो गए और सोशल मीडिया पर उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

17 मई से रात्रि पदयात्रा और एकांतिक दर्शन बंद हैं

दरअसल, 17 मई से महाराज की रात्रि पदयात्रा और एकांतिक दर्शन बंद हैं। शिष्यों ने बताया था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है। प्रेमानंद महाराज लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और उन्हें सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस करानी पड़ती है। 17 मई की रात हजारों भक्त उनके दर्शन के लिए पहुंचे थे, लेकिन महाराज रोज की तरह तड़के 3 बजे पदयात्रा पर नहीं निकले। बाद में शिष्यों ने लाउडस्पीकर से घोषणा कर बताया कि स्वास्थ्य कारणों से पदयात्रा स्थगित की जा रही है। इससे भक्त मायूस होकर लौट गए। हालांकि तीन दिन पहले महाराज केली कुंज आश्रम से निकलकर वराह घाट स्थित अपने गुरु गोविंद शरण महाराज के दर्शन के लिए पहुंचे थे। सामान्य दिनों में उनकी पदयात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

प्रेमानंद जी की दोनों किडनी खराब हैं

आपको बता दें प्रेमानंद महाराज की दोनों किडनी खराब हैं। उनकी हफ्ते में 2-3 बार डायलिसिस होती है। 13 साल की उम्र में उन्होंने ब्रह्मचारी बनने का फैसला किया। शुरुआत में प्रेमानंद महाराज का नाम 'आरयन ब्रह्मचारी' रखा गया। काशी में उन्होंने करीब 15 महीने बिताए। उन्होंने गुरु गौरी शरण जी महाराज से गुरुदीक्षा ली। फिर वह मथुरा आ गए।

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