
बहराइच दुर्गा विसर्जन हिंसा: रामगोपाल की हत्या से सरफराज को फांसी की सजा तक कब क्या हुआ
पिछले साल अक्टूबर में हुई बहराइच हिंसा मामले में कोर्ट ने 14 महीने के बाद फैसला सुना दिया। गुरुवार को आए फैसले में कोर्ट ने मुख्य आरोपी सरफराज को फांसी की सजा सुनाई, जबकि नौ दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
एक साल पहले बहराइच के महाराजगंज इलाके में हुई हिंसा मामले में कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। इस घटना के मुख्य दोषी सरफराज को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है, जबकि अन्य नौ दोषियों को उम्रकैद की सजा हुई है। पुलिस ने मामले में 13 लोगों को नामजद किया था। 13 महीने 26 दिन तक ट्रायल चला। इस दौरान तीन को कोर्ट ने बरी कर दिया था। कोर्ट ने दोषियों को सजा तो जरूर दे दी, लेकिन जब-जब 2024 की उस घटना लोग याद करते हैं तो एक बारगी सिहर जाते हैं। उस घटना ने केवल लोगों को मानसिक पीड़ा दी थी बल्कि आर्थिक नुकसान भी पहुंचा था। कई लोगों के घर उजड़ गए थे तो कुछ लोगों की दुकानें, जिनसे वह अपना जीवन यापन करते थे। अभी भी कई ऐसे लोग हैं जो 14 महीने पहले हुए नुकसान की भरपाई आज तक कर रहे हैं। पुलिस-प्रशासन ने समय रहते मामले में ऐक्शन लिया और आरोपियों की धरपकड़ शुरू की। कई लोगों की गिरफ्तारियां हुईं और उन्हें जेल भेजा गया। इसके बाद आरोपियों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई भी की गई। लेकिन घटना को लेकर लोगों के अंदर जो दर्द था वह आज भी बरकरार है। कोर्ट के फैसले के बाद वह दर्द फिर से ताजा हो गया। बहराइच हिंसा में कब क्या हुआ था? इसको लेकर विस्तार से बताएंगे।
प्रतिमा विसर्जन के रामगोपाल को मारी गई थी गोली
घटना 13 अक्टूबर 2024 की है। बहराइच जिले की महराजगंज बाजार में रविवार शाम करीब चार बजे निकल रही प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा निकाली जा रही थी। शोभायात्रा में डीजे बज रहा था, जिसे मुस्लिम समाज के लोगों ने बंद करने को कहा था। इस पर दोनों पक्षों में कहासुनी के बाद पथराव शुरू हो गया था। इसी दौरान रामगांव थाने के रेहुवा मंसूर निवासी राम गोपाल मिश्रा (25) ने एक मकान पर भगवा झंडा लहरा दिया। इस पर सरफराज ने रामगोपाल की गोली मारकर हत्या कर दी। फायरिंग की आवाज के बाद बहराइच में बवाल हो गया। जगह-जगह आगजनी और पथराव शुरू हो गया। आगजनी में घर, दुकान, कार और बाइकें भी आईं जो जलकर राख हो गई। पथराव से प्रतिमाएं क्षतिग्रस्त हो गईं थीं। महाराजगंज में भीड़ को हटाने के लिए शुरुआत पुलिस ने विसर्जन में शामिल लोगों पर लाठी चार्ज कर दिया। पुलिस से बचने के लिए लोग भागने लगे, तभी विशेष समुदाय के लोग भी असलहों से लैस होकर सड़क पर उतर आए। उनके मंसूबों को देखकर पुलिस के भी हाथ पांव फूल गए थे।
घटना के तीन दिन बाद 51 आरोपियों को भेजा गया था जेल
बहराइच में तीन दिन तक हिंसा की आग सुलगती रही। हालांकि पुलिस फोर्स ने हिंसा को किसी तरह शांत कराया। इसके बाद पुलिस ने हिंसा की पटकथा लिखने वालों की गिरफ्तारी शुरू की। एडीजी लॉ एंड आर्डर भी अमले के साथ दिन भर प्रभावित क्षेत्रों में गश्त लगाते नजर आए थे।। बवाल में पुलिस ने दो और मुदकमे दर्ज किए हैं। 51 उपद्रवियों की गिरफ्तारी की और उन्हें जेल भेजा। हालांकि पुलिस मुख्य आरोपी सरफराज की तलाश करती रही, लेकिन वह हाथ नहीं आया था।
पांच आरोपियों को एसटीएफ ने एनकाउंटर में किया था गिरफ्तार
बहराइच बवाल के फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस और एसटीएफ की टीम लगी थी। एसटीएफ को सूचना मिली कि कुछ लोग नेपाल भागने की फिराक में है। इकसे बाद एसटीएफ ने जाल बिछाया। एसटीएफ को देखकर पांच आरोपियों ने फायर शुरू कर दिया। एसटीएफ ने भी जवाबी कार्रवाई की और पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें तीन हिंसा में रामगोपाल मिश्रा की गोली मारकर हत्या करने के नामजद आरोपी थे। इनमें नाम मो. फहीम, मो. तालीम उर्फ सबलू, मो. सरफराज, अब्दुल हमीद, मो. अफजाल हैं। इसमें सरफराज, सबलू पैर में गोली से घायल हो गए थे। एसटीएफ ने उनके पास से रामगोपाल की हत्या में इस्तेमाल बंदूक समेत दो असलहे भी बरामद किए थे।
घटना के बाद शुरू हुई थी बुलडोजर कार्रवाई
बहराइच हिंसा के बाद बुलडोजर कार्रवाई शुरू की गई थी। कार्रवाई से एक दिन पहले यहां नोटिस लगाए गए थे। जिसे देखकर लोगों ने खुद ही अपने मकानों पर हथौड़ा चलाना शुरू कर दिया था। कार्रवाई के डर इस कदर था कि लोग खुद ही टिनशेड, दरवाजा व अन्य सामान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों व रिक्शों पर लादकर सुरक्षित ठिकानों पर ले जाने में लगे थे। किराएदारों ने भी समान समेटकर नए ठिकाने की तलाश करते नजर आए थे। दरअसल कस्बे से होकर निकले जिले के प्रमुख मार्ग के दोनों ओर कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर दुकानें व मकान बना लिए गए थे। लोक निर्माण विभाग के कर्मियों की ओर से अतिक्रमण हटाने को लेकर 23 मकानों व दुकानों पर नोटिस चस्पा किया गया था। इसमें रामगोपाल की हत्या को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपित सरफराज का मकान भी शामिल था। लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन की ओर से सभी को खुद अतिक्रमण हटाने का अल्टीमेटम दिया गया था।





