
बांके बिहारी मंदिर के खजाने का क्या है रहस्य? कमरे में थे दो सांप; टार्च जली और फिर...
किसी ने सोचा था कि यहां रत्न जड़ित आभूषण मिलेंगे। किसी ने सोने-चांदी के ढेर मिलने की कल्पना की थी लेकिन शनिवार को मंदिर प्रबंधन की हाई पावर्ड मंदिर मैनेजमेंट कमेटी की निगरानी में जब खजाना खुला तो यहां ऐसा कुछ नहीं।तोशाखाने में दो सांप देख हर कोई दंग रह गया।
वृंदावन के ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर का खजाना आधी सदी से अधिक (54 साल) समय से बंद था। शनिवार को इसे खोला गया तो लोग हैरान रह गए। खजाने के कमरे का ताला खुला, टीम ने टार्च जलाई और वहां दो सांप मौजूद मिले। खजाने में सांपों को देखकर हर कोई हैरान रह गया। सबकी नजरें सांपों पर टिक गईं। तत्काल वन विभाग की टीम को बुलाया गया जिसने दोनों सांपों को सुरक्षित ढंग से पकड़ लिया। सांपों के पकड़े जाने तक वहां मौजूद लोग ठिठक कर खजाने वाले कमरे को निहारते रहे।

लोगों को इस खजाने के खुलने का बेसब्री से इंतजार था। खजाने को लेकर सबने अपने जेहन में अपने-अपने हिसाब से धारणा बना रखी थी। किसी ने सोचा था कि यहां रत्न जड़ित आभूषण मिलेंगे। किसी ने सोने-चांदी के ढेर मिलने की कल्पना की थी लेकिन शनिवार को मंदिर प्रबंधन की हाई पावर्ड मंदिर मैनेजमेंट कमेटी की निगरानी में जब खजाना खुला तो यहां पर चार बॉक्स और पीतल के बर्तन ही मिले। लेकिन तोशखाने में मिले दो सांपों और नीचे की ओर जाती हुई गुप्त सीढ़ियों ने लोगों का कौतुहल और बढ़ा दिया। करीब साढ़े तीन घंटे चली कार्यवाही के दौरान मंदिर में गोस्वामी समाज विरोध प्रदर्शन करता रहा। बाद में कार्रवाई रोककर दरवाजा एक बार फिर सील कर दिया गया। बताया जा रहा है कि आखिरी बार 1971 में तोशाखाने के दरवाजे खोले गए थे। तब मिले आभूषणों को मंदिर के लॉकर में रखवा दिया गया था और तोशाखाना को सील बंद कर दिया गया था।
भक्तिकाल में बना था तोशाखाना
बताया जाता है कि ठाकुर श्री बांकेबिहारी मंदिर के गर्भगृह में ठाकुरजी के सिंहासन के नीचे यह तोशाखाना भक्तिकाल के दौरान बनवाया गया था। गर्भगृह के पास वाली कोठरी से तोशाखाना का रास्ता है। कहा जाता है कि उस समय मंदिर की सेवा में मिलने वाले आभूषणों और अन्य सामानों को यहां रखा जाता था। 1971 के बाद शनिवार (18 अक्टूबर) को फिर ऐसा मौका आया, जब तोशाखाना का रहस्य जानने के लिए दरवाजे खोले गए। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर मंदिर प्रबंधन के लिए गठित हाई पावर्ड मंदिर मैनेजमेंट कमेटी के निर्देश पर सिविल जज शिप्रा दुबे की मौजूदगी में यह कार्यवाही की गई।
तोशाखाना के नीचे कहां जाती है सीढ़ियां?
तोशाखाना में नीचे जाती हुई सीढ़ी को लेकर भी रहस्य बना हुआ है। ये सीढ़ियां मिलीं, लेकिन इसके आगे नहीं कोई नहीं गया। फिर से दरवाजे को ताला लगाकर सील बंद कर दिया। वहीं यह सवाल भी अनुत्तरित ही रहा कि तोशाखाना से मिले एक छोटे और बड़े बक्से में क्या है। इन्हें खोला नहीं गया है। वहीं दो छोटे बक्सों में बर्तन मिले हैं।





